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आओ, स्कूल चलें हम

सपनों का हक की छठी पत्रिका वैश्विक महामारी के प्रभावों की चर्चा करती है। इस वैश्विक महामारी ने पहले से ही समाज में मौजूद असमानताओं की खाई को और चौड़ा कर दिया। यह बच्चों की शिक्षा के मामले में सबसे ज्यादा अंतर लाती दिखाई दी, जो बच्चे तकनीक तक पहुँच नहीं रखते थे, उन्हें बहुत कठिनाई हुई और स्कूल के लगभग 2 वर्ष उनके बर्बाद हो गए। इसका उनके जीवन, सपनों और महत्वाकांक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?