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परामर्शदाता: राजदेव चतुर्वेदी 

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHNDs), एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) और स्वास्थ्य मंच (स्कूल स्तर) जैसे मौजूदा मंचों को मजबूत करके स्वास्थ्य और पोषण संबंधी विषयों पर किशोरों के लिए काउंसलिंग को बेहतर बनाना।  

मुख्य परिणाम

इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की, खासकर स्थानीय किशोरों के साथ, और UDAYA सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारियाँ तथा तथ्यपत्रक साझा किए। इन कार्यक्रमों की पहुँच 100 से ज्यादा किशोरों तक थी और उन्हें साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसित अनुपूरक (WIFS) तथा आयरन फॉलिक एसिड टेबलेट के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

इस अंतःक्षेप से स्थानीय अधिकारियों को चार किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने की प्रेरणा मिली, जहाँ लगभग 100 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) प्रोग्राम के अनुसार जानकारियाँ और सरकार द्वारा समर्थित अनुदान प्राप्त हुआ। 

इस अंतःक्षेप से स्थानीय अधिकारियों को चार किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने की प्रेरणा मिली, जहाँ लगभग 100 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) प्रोग्राम के अनुसार जानकारियाँ और सरकार द्वारा समर्थित अनुदान प्राप्त हुआ। 

परामर्शदाता ने सेवा प्रदायगी में शामिल विभिन्न अधिकारियों, जैसे प्रखंड स्तर सेवा प्रदाता, सरकारी अधिकारी, स्कूल के प्राचार्यों आदि की किशोरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठकें भी आयोजित की, जिससे कि वे अपनी आवश्यकताओं, सुझावों और आजमगढ़ के अत्रौला और अहरौला प्रखंडों में सेवा प्रदायगी में खामियों पर चर्चा कर सकें। 

प्रक्रिया: 

किशोरों के साथ बैठकों में UDAYA के आँकड़ों से प्राप्त जानकारियाँ दी गई और उन पर चर्चा की गई। आजमगढ़ में कुपोषण की दर बहुत अधिक है और समुदाय निगरानी कार्यों से इसके विभिन्न कारणों का पता चला है – जैसे रक्ताल्पता, गरीबी और पोषण की पहुँच में कमी तथा कम उम्र में विवाह और गर्भावस्था। किशोरों में WIFS की सेवा प्रदायगी, कीड़े मारने की दवा लेने और टीकाकरण में कमियाँ हैं। हालांकि वहाँ दो AFHCs हैं, किशोर केवल कुछ बैठकों में शामिल हुए थे। इन निष्कर्षों को संकलित कर एक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए अनुशंसाएँ शामिल हैं। 

अंतःक्षेप ने दोनों प्रखंडों में किशोरों और फ्रंटलाइन वर्कर (FLWs) तथा प्रखंड स्तर के सेवा प्रदाताओं के बीच कई बैठकें आयोजित की, ताकि आवश्यकताओं, सुझावों तथा सेवा प्रदायगी में खामियों पर चर्चा की जा सके, जिससे दोनों चयनित प्रखंडों में चार स्कूलों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए अनुदान प्राप्त हुआ। लगभग 100 किशोर इन स्वास्थ्य शिविरों में आए और RKSK के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा जिला स्तर के कार्यक्रम अधिकारियों को इस गतिविधि की एक रिपोर्ट भेजी गई, जिससे कि सभी प्रखंडों में इस मंच का नियमन किया जा सके।  

इसके साथ ही, किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी विषयों हेतु बेहतर सेवा प्रदायगी का अनुरोध करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था। सामुदायिक निगरानी से प्राप्त डेटा संबंधी जानकारियाँ और अनुशंसाएँ समुदाय के सदस्यों से साझा की गई, खासकर किशोरों, महिलाओं और युवाओं से। हस्ताक्षर अभियान काफी सफल रहा, क्योंकि माँग पत्र को न सिर्फ स्थानीय समुदाय, बल्कि अस्पताल और AHFC के कर्मचारियों से भी प्रोत्साहन मिला। किशोरों द्वारा जारी किए गए माँग पत्र पर लगभग 100 लोगों ने हस्ताक्षर किया। अनुशंसा पत्र को औपचारिक रूप से प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने स्वीकार किया। युवाओं का एक प्रतिनिधि मंडल जिला कार्यक्रम प्रबंधक – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय से भी मिला, जहाँ किशोरों ने अपनी आवश्यकताओं, कमियों और अनुशंसाओं को प्रस्तुत किया। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी में भी उभरते मुद्दों को उठाने के लिए ऐसी ही प्रस्तुति और चर्चा हुई। प्रस्तुत अनुशंसाओं को डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की बैठक में स्वीकार किया गया। कार्यान्वयन हेतु त्रैमासिक योजना में इन अनुशंसाओं को शामिल किया जाना सुनिश्चित कराने के लिए फॉलो अप विजिट आवश्यक है। 

कोविड-19 और इसके कारण हुए लॉकडाउन से इस अंतःक्षेप के प्रयासों को बहुत नुकसान पहुँचा है। वित्तीय और मानव सहित सभी संसाधनों को कोविड-19 के संक्रमणों की दर में कमी लाने के लिए लगा दिया गया था। हालांकि अधिकारी किशोरों की माँगों और अनुशंसाओं का समर्थन करना चाहते हैं, लेकिन राज्य स्तरीय अधिकारी अभी भी कोई भी अनुदान नहीं दे रहे हैं।