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परामर्शदाता: देवयानी चतुर्वेदी 

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: आँगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में सैनिटरी नैपकिन और IFAs की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना और ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHNDs) को किशोरों के लिए अनुकूल बनाना, जिसमें किशोरों के लिए विशेष सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जैसे रक्ताल्पता की जाँच, काउंसलिंग, वस्तुओं और रेफरल का वितरण।

मुख्य परिणाम: इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय, विशेषकर स्थानीय किशोरों के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की। बहराइच जिले के नवाबगंज प्रखंड के 10 गाँवों की 100 किशोरियों का चुनाव किया गया था और उन्हें ‘स्थानीय चैम्पियन’ बनने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। 

लड़कियों को डिजिटल विमर्श के लिए प्रशिक्षित किया गया, जिससे कि वे अपने मुद्दों को विभिन्न स्थापित हेल्पलाइन और पोर्टल, जैसे चीफ मिनिस्टर हेल्पलाइन-1076, चाइल्ड लाइन – 1098, IRGS पोर्टल, जन सुनवाई आवेदन, सरकारी अधिकारियों के CUG नंबर और सरकारी अधिकारियों को लिखित आवेदन आदि के द्वारा उठा सकें। किशोरों ने इन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और इसकी स्थिति को ट्रैक करना तथा इसका फॉलो अप लेना सीखा।

अंतःक्षेप ने चैम्पियन और जिला स्तरीय अधिकारियों, जैसे जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी-ICDS के बीच बैठकें भी आयोजित की, जिससे उन्हें डिस्ट्रिक हेल्थ सोसायटी की बैठकों में अपने मुद्दों से संबंधित अनुशंसाएँ रखने की सुविधा मिली। 

प्रक्रिया: नवाबगंज के 10 गाँवों की किशोरियों के साथ बैठक में उन्हें UDAYA के आँकड़ों तथा अन्य जानकारियों के बारे में बताया गया। स्वास्थ्य और पोषण जैसे थीम का उपयोग कुपोषण और रक्ताल्पता के मामलों और VHNDs जैसे कार्यक्रमों के महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए उपयोग में लाए जाते थे, जिनमें किशोरों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता था। 25 लड़कियों के 4 बैच ने इन आरंभिक बैठकों में भाग लिया।

उसके बाद बैठकों में लड़कों को भी शामिल किया गया और उन्होंने अपने समुदाय में रक्ताल्पता या नियमित रूप से रक्ताल्पता की जाँच होने या IFA टैबलेट की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा किया। उन्होंने एक स्थिति विवरणी तैयार की और प्रखंड तथा जिला स्तर के अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में अनुशंसाओं का सुझाव दिया। किशोरों को बेहतर सेवा प्रदायगी की अपनी माँगों को अग्रेषित करने के लिए डिजिटल टूल का उपयोग करने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने 12 से 20 वर्ष की आयु की 10 ‘बालिका चैम्पियन’ का भी चयन किया।

चैम्पियनों ने AWCS में IFA टैबलेट और सैनिटरी पैड की अनियमित आपूर्ति का मुद्दा प्रखंड और जिला अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी-ICDS सहित जिला स्तर के अधिकारियों के समक्ष उठाया। उन्होंने चीफ़ मिनिस्टर हेल्पलाइन -1076, चाइल्ड लाइन-1098, इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम/एकीकृत शिकायत निपटान प्रणाली (IGRS) पोर्टल, जन सुनवाई आवेदन तथा सरकारी अधिकारियों के क्लोज्ड यूज़र ग्रुप (CUG) नंबर जैसे मौजूदा चैनलों का भी उपयोग किया। उन्होंने अधिकारियों को लिखित आवेदन भी भेजा और ऑनलाइन आवेदन की स्थिति ट्रैक किया। किशोरों के मुद्दे और उनके द्वारा की गई अनुशंसाएँ डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी (DHS) की बैठक में भी उठाए गए। DHS की तरफ से पूरे प्रखंड में AWCs को सैनिटरी नैपकिन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का मौखिक आश्वासन दिया गया। IFA टैबलेट की आपूर्ति में पहले ही सुधार हो चुका है। अधिकारियों ने प्रखंड में VHND में किशोरों के लिए अधिक अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का भी मौखिक वादा किया।

एक सबसे बड़ी चुनौती व्यापक जनसमुदाय के बीच माहवारी/मासिक धर्म और उससे संबंधित स्वच्छता जैसे विषय पर बात करना भी है। आरंभिक बैठकों में केवल किशोरियों को आमंत्रित किया गया था, बाद में बैठकों में लड़कों को भी शामिल किया गया। कई महीने और कई सत्र बाद, अब जाकर लड़कियाँ अपने अनुभव खुलकर बताती हैं और लड़के किशोर प्रतिनिधि मंडल में पहल करते हैं।