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जमुई, बिहार

परामर्शदाता: शिव शंकर

डेटा थीम: स्वास्थ्य और पोषण

उद्देश्य: 

  1. एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक की सेवाओं को नियमित करना तथा छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित परामर्शदाता नियुक्त करना |
  2. जिला स्तर पर बजट सिफारिश के द्वारा सैनिटरी नैपकिन प्रदायगी कवरेज को बेहतर बनाना | 

मुख्य परिणाम: जमुई में, अंतःक्षेप ने किशोरों, उनके माता-पिता तथा फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा, आँगनवाड़ी कर्मचारियों के साथ कई चर्चाएँ आयोजित की, जिससे एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। छ- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों वाले एक इलाके के 60-70 किशोरों के एक समूह ने नियमित AFHCs की स्थापना हेतु एक माँगपत्र पर हस्ताक्षर किया। 

छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में AFHCs के लिए कमरे निर्दिष्ट किए गए हैं। यह एक बड़ी जीत थी, जो सुनिश्चित करती कि क्लीनिक आने वाले किशोर अपनी चिंताओं पर निजता तथा गोपनीयता के साथ बात कर सकते हैं। क्लीनिक में सेवाओं को दर्शाने वाला एक बोर्ड लगाया गया, जिस पर कंडोम, IFA टैबलेट, गर्भनिरोधक, सैनिटरी नैपकिन तथा SRHR आदि संबंधी सरकारी पत्रक की उपलब्धता के बारे में लिखा है। प्रत्येक AFHC को एक RKSK-प्रशिक्षित ANM उपलब्ध कराई गई है, जो काउंसलर के रूप में काम कर सके।

सैनिटरी नैपकिन के उपयोग में वृद्धि करने के लिए, किशोरियों और उनके माता-पिता को प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (DBT) योजना के बारे में बताया गया। साथ ही, DBTs को विनियमित किया गया और इसे अब किशोरियों के खातों से जोड़ दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए एक आदेश जारी किया, ताकि वे सैनेटरी नैपकिन की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करें। जिले में सैनिटरी नैपकिन की अधिप्राप्ति के लिए बजट आवंटन बढ़ाने का एक मौखिक वादा भी किया गया।

प्रक्रिया:  इस अंतःक्षेप में मुख्य ध्यान एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) तक पहुँच संबंधी डेटा और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग पर दिया गया था। UDAYA अध्ययन में AFHCs से संबंधित डेटा ने उस जमीनी अनुभव की प्रतिपुष्टि की, कि AFHCs के सुचारू संचालन में कई खामियाँ हैं। इसी प्रकार, कई किशोरियाँ सैनिटरी नैपकिन खरीदने के लिए प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (DBT) मिलने के बावजूद उनका उपयोग कर पाने में असमर्थ थीं। इसका कारण मुख्य रूप से यह था कि वे नहीं जानती थीं कि उन्हें यह पैसा मिल रहा है या यह पैसा किस चीज के लिए मिल रहा है। चिकित्सा अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी (DHS) ने अंतःक्षेप की शुरुआत में परामर्श दिया और इससे इन सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने में UDAYA के डेटा के उपयोग का समर्थन भी हुआ। 

आशा और एएनएम जैसी फ्रंटलाइन वर्कर के पास अक्सर किशोरों से उनके स्वास्थ्य के बारे में बात करने का समय नहीं होता है, क्योंकि उन्हें सीमित समय में कई अन्य जिम्मेदारियाँ पूरी करनी होती हैं। इसके परिणामस्वरूप, किशोर और युवा लोगों के पास ऐसा कोई नहीं होता, जिससे वे अपनी समस्याओं, जैसे मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता, गर्भनिरोधक उपायों, यौन स्वास्थ्य, स्वप्नदोष आदि के बारे में बात कर सकें। UDAYA के डेटा का उपयोग करके, अंतःक्षेप में किशोरों, फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा, आँगनवाड़ी कर्मचारी और अभिभावकों के समूहों को शामिल किया गया। बातचीत शुरू करने के लिए, खासकर यौन स्वास्थ्य जैसे गोपनीय रूप से इलाज कराए जाने के विषय से संबंधित डेटा को चार्ट पेपर पर आरेख बनाकर बताया गया था। FGDs की एक श्रृंखला भी आयोजित की गई थी, जहाँ कभी-कभी अभिभावक और युवा लोग मिलकर किशोरों के यौन प्रजनन स्वास्थ्य तथा अधिकारों के विषय पर अपनी चिंताएँ साझा करते थे।

अंततः, 60-70 किशोर पक्ष-समर्थक बनने के लिए प्रेरित हुए। उन्होंने जमुई जिले के 6 PHCs में AFHC सेवाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए अनुशंसाएँ अग्रेषित किया। छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में AFHCS की शुरुआत किशोरों के लिए बहुत बड़ी जीत है। इनमें से तीन PHCs में पीयर एजुकेटर भी हैं, जो हर शनिवार को क्लीनिक में बैठते हैं। वे भी किशोरों को क्लीनिक आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। 

इस अंतःक्षेप को समर्थित करने वाले परामर्शदाता शिव शंकर कहते हैं “हमने वार्तालाप शुरू किया, अब हमें पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, लड़कियों के लिए अभी भी AFHCs आना लड़कियों के लिए कठिन है, क्योंकि वे अक्सर उनके घरों से 10-20 किमी दूर होते हैं।

पक्ष-समर्थन का दूसरा फोकस समुदाय में सैनिटरी पैड के उपयोग को बढ़ावा देने पर था। कई लड़कियाँ अभी भी कपड़े के पैड का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि उनके पास पैड खरीदने के पैसे नहीं होते। फिर भी, सैनिटरी पैड स्कूलों के माध्यम से सब्सिडी पर उपलब्ध कराना और प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण देना सुनिश्चित करने के लिए फंड मौजूद हैं। कई किशोरियों को प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण मिल रहा था, लेकिन वे इसके बारे में नहीं जानती थीं, क्योंकि ये पैसे अक्सर दूसरी योजनाओं के पैसों के साथ आते थे, जैसे साइकिल योजना। इसलिए लड़कियाँ और उनके माता-पिता नहीं जानते थे कि यह पैसा किस चीज के लिए है।

पक्ष समर्थन का एक निर्णायक प्रयास इन हस्तांतरणों के बारे में जागरूकता फैलाना और इसे नियमित तथा स्पष्ट करना था। अब जब यह लड़कियों को नहीं मिलता है तो वे तुरंत इसके बारे में पूछती हैं। अभी भी कुछ चुनौतियाँ हैं। उदाहरण के लिए, एक लड़की ने परामर्शदाता से कहा कि उसकी माँ ने उन पैसों से खाद खरीद लिया। इसलिए, उस युवती की माँ से बात करके उन्हें इन दो जरूरतों के बारे में बताया और समझाया गया कि बेटी के लिए सैनिटरी नैपकिन खरीदना भी उतना ही जरूरी है, जितना खाद खरीदना, क्योंकि इससे उनकी बेटी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। 

इसके अतिरिक्त, PHCs में यूथ क्लब बनाए जा रहे हैं। इससे किशोर परियोजना पूर्ण होने के बाद भी अपने स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर पीयर एजुकेटर से बात करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे। मौजूदा परियोजना में शामिल कई किशोर-किशोरियों ने बताए गए डेटा को समझने के बाद किशोरों के SRHR मुद्दों पर बात करना शुरू कर दिया है। इससे तरंग प्रभाव उत्पन्न हुआ है, क्योंकि युवा इन विषयों पर बात करने के लिए उत्सुक थे और अपने माता-पिता को भी इन चर्चाओं में शामिल करना चाहते थे।