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परामर्शदाता: सुधीर त्रिपाठी 

डेटा थीम: अनुदान 

उद्देश्य: किशोरों के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHND) में परिवार नियोजन हेतु काउंसलिंग की गुणवत्ता में सुधार लाना, जिसमें परामर्शदाता का प्रखंड स्तर पर और सुदूर क्षेत्रों में पहुँचना तथा इसके अतिरिक्त ललितपुर जिला को पीयर एजुकेटर जिला में जोड़ना शामिल है। 

मुख्य परिणाम: अंतःक्षेप ने पाँच चयनित गाँवों में किशोर-किशोरियों के समूहों के साथ बैठकें आयोजित की, जिसके परिणामस्वरूप किशोर ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHND) पर आने लगे और पांच VHNDs पर उपलब्ध विभिन्न गतिविधियों पर अनुशंसाओं सहित एक रिपोर्ट तैयार किया। 

अंतःक्षेप ने किशोरों के समूहों और विभिन्न अधिकारियों तथा सेवा प्रदाताओं, जैसे जिला और प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों और फ्रंटलाइन वर्कर के बीच पक्ष समर्थन बैठकें आयोजित कराई, ताकि किशोर अपने निष्कर्ष और अनुशंसाएँ प्रस्तुत कर सकें। अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन अभी तक इनका कार्यान्वयन नहीं किया गया है। 

परामर्शदाता ने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों के साथ पक्ष समर्थन बैठकें आयोजित किया। कुछ उम्मीदवार किशोरों के स्वास्थ्य को अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाने के लिए सहमत हैं। 

प्रक्रिया:  आरंभिक बैठकों में, किशोरों ने UDAYA के आँकड़ों और उनके लिए उपलब्ध काउंसलिंग की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने अभी उपलब्ध विभिन्न परिवार नियोजन विधियों पर, परिवार नियोजन की पहुँच संबंधी समस्याओं पर भी चर्चा की और स्थानीय स्तर की जानकारी तथा आँकड़े एकत्र करने के लिए समुदाय स्तर पर निगरानी कार्य की रूपरेखा तैयार की। 

किशोरों द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पाँच गाँवों में पाँच VHNDs पर निगरानी तथा दस्तावेजीकरण गतिविधियों के लिए जाया गया है। उनके निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट तैयार की गई और बेहतर परामर्श तथा सुदूरवर्ती पहुँच वाले परामर्शदाता की माँग करते हुए एक पत्र भी लिखा गया था। इसके बाद, किशोरों का प्रतिनिधि मंडल विभिन्न जिलों और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों, जैसे सेवा प्रदाताओं और परामर्शदाताओं से मिला। वे निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों से भी मिले। प्रतिनिधि मंडल ने UDAYA डेटा, VHNDs पर काउंसलिंग की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएँ तथा बेहतर काउंसलिंग सेवाओं के अनुरोध हेतु अपने पत्र सौंपे। प्रतिनिधि मंडल को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और उनकी अनुशंसाओं को अधिकांश अधिकारियों ने प्राप्त और स्वीकार किया। सच कहें तो सेवा प्रदाताओं तथा परामर्शदाताओं से बैठकों में सेवा प्रदायगी तथा वितरण में उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दिया गया और किशोरों की अनुशंसाओं के साथ उनकी अनुशंसाओं को भी इसमें शामिल किया गया। 

किशोरों के प्रतिनिधि मंडल ने डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की बैठक, तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (MOIC) और जिलाधिकारी (DM) को भी उपरोक्त पत्र और रिपोर्ट सौंपे। इन सभी अधिकारियों ने किशोरों के लिए बेहतर परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित करने का मौखिक वादा किया। चुनाव में खड़े होने वाले कुछ उम्मीदवारों ने भी इसके लिए समर्थन देने का आश्वासन दिया है और बेहतर परामर्श सेवाओं एवं किशोरों की स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी में सामान्य सुधार को प्रचार अभियान की प्रतिबद्धता के तौर पर पेश करने का वादा किया है। 

कोविड-19 और उसके बाद होने वाला लॉकडाउन इस अंतःक्षेप के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर आया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कोविड-19 के राहत एवं प्रबंधन कार्य में व्यस्त हो गए। लॉकडाउन का दूसरा बड़ा भयंकर प्रभाव यह था कि बाल विवाहों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सामुदायिक सूचनाओं के अनुसार, अवयस्कों के विवाह की दर लगभग दोगुनी हो गई। स्कूल बंद थे तो आवश्यक वस्तुओं, जैसे IFA टैबलेट या सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं कराए जा सके। फिर भी, किशोरों का प्रतिनिधि मंडल प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों से बेहतर सेवा प्रदायगी सुनिश्चित कराने के लिए फॉलो अप लेने के लिए प्रतिबद्ध रहा।