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परामर्शदाता: भारत भूषण

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण, एजेंसी समुदाय और नागरिकता

उद्देश्य: नवादा जिले के चुनिंदा प्रखंडों में किशोरियों के लिए योजना (SAG) के अंतर्गत पोषण संबंधी जानकारी और सेवा कवरेज में सुधार 

मुख्य परिणाम:  परियोजना में नवादा जिले के 10 गाँवों की 11 किशोरी समूह की लड़कियों को शामिल किया गया। जागरूकता शिविरों के द्वारा, उन्होंने किशोरियों के लिए योजना (SAG) के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं के बारे में जाना, जिसमें हर सप्ताह आयरन और फॉलिक एसिड अनुपूरक दिया जाना और उन्हें कैसे प्राप्त किया जाए, ये जानना शामिल है। इस बड़े समूह से, युवा नेताओं (यूथ चैम्पियन) के रूप में 15 लड़कियों का चयन किया गया। इन लड़कियों को नेतृत्व प्रशिक्षण के लिए भेजा गया और इन्होंने यह भी समझा कि SAG की प्रदायगी की निगरानी और पक्ष समर्थन कैसे करना है।

15 लड़कियों द्वारा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) से अनुरोध किया गया कि किशोर क्लीनिक हर सप्ताह एक दिन खुलना चाहिए, ताकि वे साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक और अन्य सेवाएँ, जैसे परामर्श प्राप्त कर सकें। इसके परिणामस्वरूप प्रखंड विकास अधिकारी ने इस संदर्भ में एक आदेशपत्र जारी किया और अब क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को खुलता है। प्रखंड विकास अधिकारी ने एएनएम को वहाँ रहने का दायित्व सौंपा है। लड़कियाँ अब अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद क्लीनिक नियमित रूप से जाती हैं और समुदाय के दूसरे लोगों को भी अपने साथ ले जाती हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवसों (VHSND) में किशोर की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए, VHSND समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच कई बैठकें की गई। इसके परिणामस्वरूप, मौखिक रूप से वादा किया गया कि ANMs किशोरियों की चिंताओं को अकेले में सुनेंगी।

प्रक्रिया: इस अंतःक्षेप में UDAYA डेटा से किशोरियों के पोषण स्तर और रक्ताल्पता संबंधी डेटा का उपयोग किया गया। मुख्य चिंता यह थी कि युवतियों को हर सप्ताह आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक RKSK कार्यक्रम में बताए अनुसार नहीं मिल रहे थे। इस अंतःक्षेप ने किशोरियों को कुपोषण और रक्ताल्पता से बचाने पर ध्यान दिया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई समस्याओं का सुधार हो सकता था।

डेटा का उपयोग परियोजना के दो चरणों में किया गया। पहले, इसका उपयोग जागरूकता सत्रों और किशोरियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में किया गया। इससे लड़कियों को अपने समुदाय में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं को समझने और यह जानने में मदद मिली कि बाद में योजनाओं की निगरानी करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए। दूसरी बार, डेटा का उपयोग उन सरकारी अधिकारियों से बात करने के दौरान किया गया, जो इस परियोजना से जुड़े थे। अधिकारियों ने डेटा को सेवा प्रदायगी में सुधार के अवसर के तौर पर देखा। 

एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि लड़कियों ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किशोर क्लीनिक हर सप्ताह खोलने का आवेदन किया। 

इस अंतःक्षेप का समर्थन करने वाले परामर्शदाता भारत भूषण कहते हैं “लड़कियों ने केवल एक दिन खोलने की माँग रखी थी, लेकिन उन्होंने यह अनुरोध किया तो वे कितनी उत्सुक हैं इसके लिए, यह देखकर MOIC ने आगे बढ़कर सप्ताह में दो दिन क्लीनिक खोलने का आदेश दिया। यह देखना सुखद आश्चर्य है कि जो युवतियाँ घर से भी नहीं निकलती थीं, अब अपने अधिकार पाने के लिए सशक्त हो रही हैं |

परियोजना की एक संबंधित रणनीति यह सुनिश्चित करनी थी कि ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवस (VHSNDs) पर किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जाए। एएनएम और डॉक्टर लंबे चौड़े एजेंडे के साथ VHSND को कवर करने लगे, किशोरों की स्वास्थ्य समस्याएँ पीछे छूटने लगी, विशेषकर परामर्श सेवाओं का इसमें बड़ा योगदान था। युवा लोगों को अपनी चिंताओं और सवालों को उठाने के लिए वांछित निजता नहीं मिल रही थी। इसके लिए, ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच बैठकें हुई और इसके परिणामस्वरूप, एक मौखिक वादा किया गया कि ANMs किशोरियों की समस्याएँ अकेले में सुना करेंगी। इस परियोजना के दौरान हुए कुछ VHSNDs में, युवा नेताओं ने ANMs का सहयोग किया और ईवेंट की निगरानी का अवसर प्राप्त किया। उन्होंने देखा कि कितनी महिलाएँ आती हैं और क्या सेवाएँ दी जा रही हैं।

किशोरियाँ अब नियमित रूप से स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं और समुदाय के अन्य लोगों को भी ले जाती हैं। यह सेवाओं की माँग उत्पन्न करने की दिशा में दीर्घकालिक बदलाव की ओर ले जाता है और अंततः यह सुनिश्चित करता है कि सेवाएँ उपलब्ध हो सकें। जब सेवाएँ उपलब्ध हो जाती हैं तो वे आगे क्या कदम उठा सकती हैं, परामर्शदाता से यह जानने के लिए उत्सुक रहती हैं, जिसमें सरकारी अधिकारियों से मिलना भी शामिल है। परियोजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियाँ अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने के लिए सक्षम और आत्मविश्वासी बन सकें। यह सुनिश्चित करेगा कि जब परियोजना पूर्ण भी हो जाएगी, उसके बाद भी समुदाय में उन लड़कियों ने जो क्षमता अर्जित की, वह आने वाले लंबे समय तक बनी रहेगी।