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वैशाली, बिहार

परामर्शदाता: अख्तरी

डेटा थीम: स्वास्थ्य और पोषण, अनुदान, एजेंसी समुदाय और नागरिकता

उद्देश्य:

  1. एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) और ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवसों (VHND) में किशोरों की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना 
  2. AFHC सेवाओं के लिए सूचना शिक्षा संप्रेषण/व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण हेतु बजट आवंटन

मुख्य परिणाम: इस परियोजना में भगवानपुर प्रखंड के 10 पंचायतों पर ध्यान दिया गया था।  

10 पंचायतों के 50 फ्रंटलाइन वर्कर पर एक सर्वेक्षण किया गया, जिससे कि यह समझा जा सके कि वे किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं और योजनाओं के बारे में क्या समझते हैं। निष्कर्षों से पता चला कि कोई एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक नहीं चल रहा और कोई स्वास्थ्य दिवस आयोजित नहीं किए जा रहे थे। इन्हें UDAYA अध्ययन के निष्कर्षों के विरुद्ध रखा गया और फ्रंटलाइन वर्कर को इसके बारे में बताया गया। इसके आधार पर, 10 पंचायतों के फ्रंटलाइन वर्कर ने अपने पंचायत के आँगनवाड़ी केंद्रों में किशोरी स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए। यहाँ उन्होंने लड़कियों की स्वास्थ्य जाँच की, जिसमें वजन, ऑक्सीजन स्तर की जाँच शामिल थी; मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जानकारियाँ दी; और IFA टैबलेट बाँटे।

10 पंचायतों की किशोरियों के साथ पक्ष समर्थन कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जहाँ उन्हें UDAYA डेटा के बारे में बताया गया और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उनके लिए मिलने वाले अनुदानों की जानकारी दी गई। इस समूह की 55 लड़कियों ने कई अनुशंसाएँ तैयार की और माँगपत्र पर हस्ताक्षर किया। उन्होंने RKSK और अपने स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी योजनाओं के बारे में और जानकारी माँगी; और आशा तथा एएनएम को भी किशोरों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं में सहयोग हेतु प्रशिक्षण देने के लिए कहा। यह पत्र स्वास्थ्य शिविर के दिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा गया। 

डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी ने इन अनुशंसाओं को स्वीकार किया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स को विनियमित करने के लिए एक पत्र जारी किया। वर्तमान में, इसका हर महीने एक दिन खुलना शुरू हो गया है और एक एएनएम वहाँ परामर्शदाता के रूप में बैठती है।

प्रक्रिया: इस परियोजना में दो मुख्य डेटा पॉइन्ट का उपयोग किया गया। एक RKSK कार्यक्रम, विशेषकर AFHC क्लीनिक की स्थिति और कार्यान्वयन। दूसरा पॉइन्ट किशोरियों के लिए योजना का कार्यान्वयन, खासतौर से हर सप्ताह आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक (WIFS) देना। ये डेटा पॉइन्ट इसलिए चुने गए, क्योंकि इनसे पता चला कि किशोरों को जरूरी SRH जानकारी और सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। उदाहरण के लिए, वहाँ कोई AFHCs नहीं चल रहा था और न स्वास्थ्य दिवस आयोजित किए जा रहे थे। अंतःक्षेप ने किशोरियों से संबंधित विषयों को प्राथमिकता दी।

डेटा का उपयोग फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा और एएनएम से; प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों से और स्वयं किशोरियों से बातचीत शुरू करने के लिए किया गया। फ्रंटलाइन वर्कर और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए, इस डेटा को देखने से सेवा प्रदायगी में खामियों को जानने में मदद मिली और वास्तव में उन्होंने माना कि वे किशोरों को जरूरी सेवाएँ प्रदान करने से चूक गए हैं। वे डेटा के प्रति संवेदनशील थे और सेवा प्रदायगी की खामियों को दूर करने के लिए उत्सुक थे। फ्रंटलाइन वर्कर ने खास तौर से दर्शाया कि वे गर्भवती स्त्रियों और नयी माँओं को सेवाएँ प्रदान करने पर ही ध्यान देती रही हैं, किशोरों का स्वास्थ्य पीछे छूटता रहा है। विभिन्न बैठकों में, UDAYA अध्ययन के डेटा का उपयोग इसे स्तानीय उदाहरण के द्वारा दर्शाते हुए सरलीकृत करके किया गया, ताकि समुदाय स्वयं को इससे जोड़कर देख सके।

 परियोजना ने फ्रंटलाइन वर्कर की कही बातों की UDAYA के निष्कर्षों से तुलना की, विशेष रूप से, उनसे, जो किशोरों से संबंधित थे। 10 पंचायतों के 50 फ्रंटलाइन वर्कर पर एक छोटा सा सर्वेक्षण किया गया, जिससे समझा जा सके कि वे किशोरों के स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे संबंधित योजनाओं से क्या समझते हैं। इसके बाद, फ्रंटलाइन वर्कर की एक बैठक में, इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष और UDAYA के डेटा दिखाए गए और इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि वास्तव में वहाँ किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं में कई खामियाँ थी। इस प्रक्रिया से प्रत्येक फ्रंटलाइन वर्कर को अपने पंचायत में एक योजना बनाने और अपने पंचायत के आँगनवाड़ी केंद्रों में किशोरी स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

साथ ही, किशोरियों के साथ कार्यशालाएँ आयोजित की गई, जिससे RKSK के माध्यम से चलाई जा रही सेवाओं के मामले में उनकी जानकारी के स्तर को मापा जा सके। अधिकांशतः लड़कियाँ केवल इतना जानती थी कि उन्हें IFA टैबलेट मिलना चाहिए; उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौरान यह बंद हो गया। वे किसी अन्य संबंधित सेवा के बारे में नहीं जानती थीं और उन्होंने बताया कि न तो उनके माता-पिता, न ही फ्रंटलाइन वर्कर ने ही उन्हें स्वास्थ्य अथवा यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में उन्हें कोई जानकारी दी। ये किशोरियाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शायद ही कोई स्वास्थ्य सेवा लेने जाती हों, क्योंकि लोग उनके अस्पताल जाने को बड़ी ही जिज्ञासा या शर्म की दृष्टि से देखते हैं। विशेषकर युवतियों के लिए, समुदाय के लोग उनके इस व्यवहार पर लांक्षण लगाते रहते हैं। लड़कियों के लिए कार्यशालाएँ आयोजित किए जाने के बाद, उन्होंने PHC जाना और एएनएम तथा आशा से जरूरी जानकारी या सेवाओं के बारे में बात करना शुरू किया। किशोरी स्वास्थ्य शिविर इन वार्तालापों को शुरू करने और किशोरियों तथा फ्रंटलाइन वर्कर के बीच जान-पहचान होने के अवसर के रूप में भी सामने आए।

परियोजना का तीसरा चरण किशोरियों को PHC ले जाना था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने UDAYA का डेटा देखने के बाद एक दिन का स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किया था। PHC के स्वास्थ्य अधिकारी इस ईवेंट को संचालित करने के लिए वास्तव में उत्सुक थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी लड़कियों की स्वास्थ्य जाँच की जाए; कुछ की कोविड जाँच और टीकाकरण भी हुआ।