जमुई, बिहार

जमुई, बिहार

परामर्शदाता: शिव शंकर

डेटा थीम: स्वास्थ्य और पोषण

उद्देश्य: 

  1. एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक की सेवाओं को नियमित करना तथा छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित परामर्शदाता नियुक्त करना |
  2. जिला स्तर पर बजट सिफारिश के द्वारा सैनिटरी नैपकिन प्रदायगी कवरेज को बेहतर बनाना | 

मुख्य परिणाम: जमुई में, अंतःक्षेप ने किशोरों, उनके माता-पिता तथा फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा, आँगनवाड़ी कर्मचारियों के साथ कई चर्चाएँ आयोजित की, जिससे एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। छ- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों वाले एक इलाके के 60-70 किशोरों के एक समूह ने नियमित AFHCs की स्थापना हेतु एक माँगपत्र पर हस्ताक्षर किया। 

छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में AFHCs के लिए कमरे निर्दिष्ट किए गए हैं। यह एक बड़ी जीत थी, जो सुनिश्चित करती कि क्लीनिक आने वाले किशोर अपनी चिंताओं पर निजता तथा गोपनीयता के साथ बात कर सकते हैं। क्लीनिक में सेवाओं को दर्शाने वाला एक बोर्ड लगाया गया, जिस पर कंडोम, IFA टैबलेट, गर्भनिरोधक, सैनिटरी नैपकिन तथा SRHR आदि संबंधी सरकारी पत्रक की उपलब्धता के बारे में लिखा है। प्रत्येक AFHC को एक RKSK-प्रशिक्षित ANM उपलब्ध कराई गई है, जो काउंसलर के रूप में काम कर सके।

सैनिटरी नैपकिन के उपयोग में वृद्धि करने के लिए, किशोरियों और उनके माता-पिता को प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (DBT) योजना के बारे में बताया गया। साथ ही, DBTs को विनियमित किया गया और इसे अब किशोरियों के खातों से जोड़ दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए एक आदेश जारी किया, ताकि वे सैनेटरी नैपकिन की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करें। जिले में सैनिटरी नैपकिन की अधिप्राप्ति के लिए बजट आवंटन बढ़ाने का एक मौखिक वादा भी किया गया।

प्रक्रिया:  इस अंतःक्षेप में मुख्य ध्यान एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) तक पहुँच संबंधी डेटा और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग पर दिया गया था। UDAYA अध्ययन में AFHCs से संबंधित डेटा ने उस जमीनी अनुभव की प्रतिपुष्टि की, कि AFHCs के सुचारू संचालन में कई खामियाँ हैं। इसी प्रकार, कई किशोरियाँ सैनिटरी नैपकिन खरीदने के लिए प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (DBT) मिलने के बावजूद उनका उपयोग कर पाने में असमर्थ थीं। इसका कारण मुख्य रूप से यह था कि वे नहीं जानती थीं कि उन्हें यह पैसा मिल रहा है या यह पैसा किस चीज के लिए मिल रहा है। चिकित्सा अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी (DHS) ने अंतःक्षेप की शुरुआत में परामर्श दिया और इससे इन सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने में UDAYA के डेटा के उपयोग का समर्थन भी हुआ। 

आशा और एएनएम जैसी फ्रंटलाइन वर्कर के पास अक्सर किशोरों से उनके स्वास्थ्य के बारे में बात करने का समय नहीं होता है, क्योंकि उन्हें सीमित समय में कई अन्य जिम्मेदारियाँ पूरी करनी होती हैं। इसके परिणामस्वरूप, किशोर और युवा लोगों के पास ऐसा कोई नहीं होता, जिससे वे अपनी समस्याओं, जैसे मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता, गर्भनिरोधक उपायों, यौन स्वास्थ्य, स्वप्नदोष आदि के बारे में बात कर सकें। UDAYA के डेटा का उपयोग करके, अंतःक्षेप में किशोरों, फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा, आँगनवाड़ी कर्मचारी और अभिभावकों के समूहों को शामिल किया गया। बातचीत शुरू करने के लिए, खासकर यौन स्वास्थ्य जैसे गोपनीय रूप से इलाज कराए जाने के विषय से संबंधित डेटा को चार्ट पेपर पर आरेख बनाकर बताया गया था। FGDs की एक श्रृंखला भी आयोजित की गई थी, जहाँ कभी-कभी अभिभावक और युवा लोग मिलकर किशोरों के यौन प्रजनन स्वास्थ्य तथा अधिकारों के विषय पर अपनी चिंताएँ साझा करते थे।

अंततः, 60-70 किशोर पक्ष-समर्थक बनने के लिए प्रेरित हुए। उन्होंने जमुई जिले के 6 PHCs में AFHC सेवाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए अनुशंसाएँ अग्रेषित किया। छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में AFHCS की शुरुआत किशोरों के लिए बहुत बड़ी जीत है। इनमें से तीन PHCs में पीयर एजुकेटर भी हैं, जो हर शनिवार को क्लीनिक में बैठते हैं। वे भी किशोरों को क्लीनिक आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। 

इस अंतःक्षेप को समर्थित करने वाले परामर्शदाता शिव शंकर कहते हैं “हमने वार्तालाप शुरू किया, अब हमें पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, लड़कियों के लिए अभी भी AFHCs आना लड़कियों के लिए कठिन है, क्योंकि वे अक्सर उनके घरों से 10-20 किमी दूर होते हैं।

पक्ष-समर्थन का दूसरा फोकस समुदाय में सैनिटरी पैड के उपयोग को बढ़ावा देने पर था। कई लड़कियाँ अभी भी कपड़े के पैड का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि उनके पास पैड खरीदने के पैसे नहीं होते। फिर भी, सैनिटरी पैड स्कूलों के माध्यम से सब्सिडी पर उपलब्ध कराना और प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण देना सुनिश्चित करने के लिए फंड मौजूद हैं। कई किशोरियों को प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण मिल रहा था, लेकिन वे इसके बारे में नहीं जानती थीं, क्योंकि ये पैसे अक्सर दूसरी योजनाओं के पैसों के साथ आते थे, जैसे साइकिल योजना। इसलिए लड़कियाँ और उनके माता-पिता नहीं जानते थे कि यह पैसा किस चीज के लिए है।

पक्ष समर्थन का एक निर्णायक प्रयास इन हस्तांतरणों के बारे में जागरूकता फैलाना और इसे नियमित तथा स्पष्ट करना था। अब जब यह लड़कियों को नहीं मिलता है तो वे तुरंत इसके बारे में पूछती हैं। अभी भी कुछ चुनौतियाँ हैं। उदाहरण के लिए, एक लड़की ने परामर्शदाता से कहा कि उसकी माँ ने उन पैसों से खाद खरीद लिया। इसलिए, उस युवती की माँ से बात करके उन्हें इन दो जरूरतों के बारे में बताया और समझाया गया कि बेटी के लिए सैनिटरी नैपकिन खरीदना भी उतना ही जरूरी है, जितना खाद खरीदना, क्योंकि इससे उनकी बेटी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। 

इसके अतिरिक्त, PHCs में यूथ क्लब बनाए जा रहे हैं। इससे किशोर परियोजना पूर्ण होने के बाद भी अपने स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर पीयर एजुकेटर से बात करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे। मौजूदा परियोजना में शामिल कई किशोर-किशोरियों ने बताए गए डेटा को समझने के बाद किशोरों के SRHR मुद्दों पर बात करना शुरू कर दिया है। इससे तरंग प्रभाव उत्पन्न हुआ है, क्योंकि युवा इन विषयों पर बात करने के लिए उत्सुक थे और अपने माता-पिता को भी इन चर्चाओं में शामिल करना चाहते थे।

मधुबनी, बिहार

परामर्शदाता: रमेश

डेटा थीम: स्वास्थ्य और पोषण, अनुदान

उद्देश्य: वितरण संबंधी बाधाओं का समाधान करके साप्ताहिक आयरन फॉलिक अनुपूरक कार्यक्रम की स्कूल स्तर पर कवरेज बेहतर बनाना; पोषण, विशेषकर रक्ताल्पता के जोखिम, आहार विविधता के महत्व, IFA अनुपूरकता संबंधी जानकारी और परामर्श तक बेहतर पहुँच प्रदान करना।

मुख्य परिणाम: परियोजना में पाँच उच्च विद्यालयों और 10 आँगनवाड़ी केंद्रों के किशोरों को शामिल किया गया।

कम से कम 100 लोग, जिसमें किशोर, आँगनवाड़ी केंद्र, स्कूल के शिक्षक और अन्य हितधारकों को साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई। 

किशोरों के स्वास्थ्य से संबंधित चिंताओं का समाधान करने तथा विभिन्न सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल में युवा समितियाँ बनाई गई।

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (MOIC) ने चुनिंदा विद्यालयों में स्वास्थ्य जाँच और किशोरियों के लिए IFA वितरण आयोजित किया। MOIC और प्रखंड संसाधन समन्वयक ने भी नियमित रूप से IFA टैबलेट की अधिप्राप्ति के लिए आधिकारिक पत्र जारी करके, इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

प्रक्रिया:  इस परियोजना का फोकस वितरण संबंधी बाधाओं को दूर करके, स्कूल में RKSK के कार्यान्वयन, विशेष रूप से साप्ताहिक आयरन फॉलिक अनुपूरक कार्यक्रम (WIFS) में सुधार लाना तथा जानकारी एवं परामर्श तक पहुँच बेहतर बनाना था। यहाँ मुख्य चिंता इस बात की थी कि आयरन फॉलिक एसिड (IFA) टैबलेट किशोरियों को नहीं दिए जा रहे थे। इसके अतिरिक्त, फील्ड विजिट के दौरान, यह देखा गया था कि कई स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं था; लड़के और लड़की एक ही शौचालय में जाते थे। स्कूल के शिक्षकों, प्रखंड के विभागों के अधिकारियों, आँगनवाड़ी कर्मचारी और आशा तथा एएनएम जैसे फ्रंटलाइन वर्कर के साथ बैठकों के माध्यम से इन मुद्दों का समाधान किया गया।. 

बैठकों और परामर्शों से पता चला कि IFA टैबलेट स्कूल में नहीं दिए जा रहे थे, क्योंकि संबंधित कर्मचारी WIFS योजना के इस पहलु के बारे में नहीं जानते थे; वे समझते थे कि किशोरियों को IFA टैबलेट देने का काम आँगनवाड़ी कर्मचारियों और FLWs का होना चाहिए। फिर भी, अपनी जिम्मेदारी को जानने के बाद जिम्मेदार शिक्षक और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी इस काम के लिए तैयार थे। उन्होंने चयनित स्कूलों और आँगनवाड़ी केंद्रों में WIFS सेवा के घटकों को विनियमित करने का वादा किया है।  

यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्कूल न आने वाली किशोरियों को भी समय पर IFA टैबलेट मिलता रहे, आँगनवाड़ी केंद्रों के प्रभारी बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी (CDPO) से आगे बातचीत की जा रही है। परियोजना की दूसरी सफलता किशोरों की स्वास्थ्य चिंताओं के समाधान के लिए स्कूल युवा समितियों का निर्माण करना और विभिन्न सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इनमें पीयर एजुकेटर होते हैं और एक पुरुष और एक महिला फोकल पॉइंट टीचर होते हैं, जो उनकी मदद के लिए परामर्शदाताओं के रूप में काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, कई स्कूलों में शौचालय सुविधा की मरम्मत करवाई गई है, ताकि लड़कियों को स्वच्छ शौचालय मिल सके — जो लड़कियों को स्कूल में बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

नवादा, बिहार

परामर्शदाता: भारत भूषण

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण, एजेंसी समुदाय और नागरिकता

उद्देश्य: नवादा जिले के चुनिंदा प्रखंडों में किशोरियों के लिए योजना (SAG) के अंतर्गत पोषण संबंधी जानकारी और सेवा कवरेज में सुधार 

मुख्य परिणाम:  परियोजना में नवादा जिले के 10 गाँवों की 11 किशोरी समूह की लड़कियों को शामिल किया गया। जागरूकता शिविरों के द्वारा, उन्होंने किशोरियों के लिए योजना (SAG) के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं के बारे में जाना, जिसमें हर सप्ताह आयरन और फॉलिक एसिड अनुपूरक दिया जाना और उन्हें कैसे प्राप्त किया जाए, ये जानना शामिल है। इस बड़े समूह से, युवा नेताओं (यूथ चैम्पियन) के रूप में 15 लड़कियों का चयन किया गया। इन लड़कियों को नेतृत्व प्रशिक्षण के लिए भेजा गया और इन्होंने यह भी समझा कि SAG की प्रदायगी की निगरानी और पक्ष समर्थन कैसे करना है।

15 लड़कियों द्वारा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) से अनुरोध किया गया कि किशोर क्लीनिक हर सप्ताह एक दिन खुलना चाहिए, ताकि वे साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक और अन्य सेवाएँ, जैसे परामर्श प्राप्त कर सकें। इसके परिणामस्वरूप प्रखंड विकास अधिकारी ने इस संदर्भ में एक आदेशपत्र जारी किया और अब क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को खुलता है। प्रखंड विकास अधिकारी ने एएनएम को वहाँ रहने का दायित्व सौंपा है। लड़कियाँ अब अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद क्लीनिक नियमित रूप से जाती हैं और समुदाय के दूसरे लोगों को भी अपने साथ ले जाती हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवसों (VHSND) में किशोर की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए, VHSND समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच कई बैठकें की गई। इसके परिणामस्वरूप, मौखिक रूप से वादा किया गया कि ANMs किशोरियों की चिंताओं को अकेले में सुनेंगी।

प्रक्रिया: इस अंतःक्षेप में UDAYA डेटा से किशोरियों के पोषण स्तर और रक्ताल्पता संबंधी डेटा का उपयोग किया गया। मुख्य चिंता यह थी कि युवतियों को हर सप्ताह आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक RKSK कार्यक्रम में बताए अनुसार नहीं मिल रहे थे। इस अंतःक्षेप ने किशोरियों को कुपोषण और रक्ताल्पता से बचाने पर ध्यान दिया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई समस्याओं का सुधार हो सकता था।

डेटा का उपयोग परियोजना के दो चरणों में किया गया। पहले, इसका उपयोग जागरूकता सत्रों और किशोरियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में किया गया। इससे लड़कियों को अपने समुदाय में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं को समझने और यह जानने में मदद मिली कि बाद में योजनाओं की निगरानी करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए। दूसरी बार, डेटा का उपयोग उन सरकारी अधिकारियों से बात करने के दौरान किया गया, जो इस परियोजना से जुड़े थे। अधिकारियों ने डेटा को सेवा प्रदायगी में सुधार के अवसर के तौर पर देखा। 

एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि लड़कियों ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किशोर क्लीनिक हर सप्ताह खोलने का आवेदन किया। 

इस अंतःक्षेप का समर्थन करने वाले परामर्शदाता भारत भूषण कहते हैं “लड़कियों ने केवल एक दिन खोलने की माँग रखी थी, लेकिन उन्होंने यह अनुरोध किया तो वे कितनी उत्सुक हैं इसके लिए, यह देखकर MOIC ने आगे बढ़कर सप्ताह में दो दिन क्लीनिक खोलने का आदेश दिया। यह देखना सुखद आश्चर्य है कि जो युवतियाँ घर से भी नहीं निकलती थीं, अब अपने अधिकार पाने के लिए सशक्त हो रही हैं |

परियोजना की एक संबंधित रणनीति यह सुनिश्चित करनी थी कि ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवस (VHSNDs) पर किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जाए। एएनएम और डॉक्टर लंबे चौड़े एजेंडे के साथ VHSND को कवर करने लगे, किशोरों की स्वास्थ्य समस्याएँ पीछे छूटने लगी, विशेषकर परामर्श सेवाओं का इसमें बड़ा योगदान था। युवा लोगों को अपनी चिंताओं और सवालों को उठाने के लिए वांछित निजता नहीं मिल रही थी। इसके लिए, ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समितियों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच बैठकें हुई और इसके परिणामस्वरूप, एक मौखिक वादा किया गया कि ANMs किशोरियों की समस्याएँ अकेले में सुना करेंगी। इस परियोजना के दौरान हुए कुछ VHSNDs में, युवा नेताओं ने ANMs का सहयोग किया और ईवेंट की निगरानी का अवसर प्राप्त किया। उन्होंने देखा कि कितनी महिलाएँ आती हैं और क्या सेवाएँ दी जा रही हैं।

किशोरियाँ अब नियमित रूप से स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं और समुदाय के अन्य लोगों को भी ले जाती हैं। यह सेवाओं की माँग उत्पन्न करने की दिशा में दीर्घकालिक बदलाव की ओर ले जाता है और अंततः यह सुनिश्चित करता है कि सेवाएँ उपलब्ध हो सकें। जब सेवाएँ उपलब्ध हो जाती हैं तो वे आगे क्या कदम उठा सकती हैं, परामर्शदाता से यह जानने के लिए उत्सुक रहती हैं, जिसमें सरकारी अधिकारियों से मिलना भी शामिल है। परियोजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियाँ अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने के लिए सक्षम और आत्मविश्वासी बन सकें। यह सुनिश्चित करेगा कि जब परियोजना पूर्ण भी हो जाएगी, उसके बाद भी समुदाय में उन लड़कियों ने जो क्षमता अर्जित की, वह आने वाले लंबे समय तक बनी रहेगी।

वैशाली, बिहार

वैशाली, बिहार

परामर्शदाता: अख्तरी

डेटा थीम: स्वास्थ्य और पोषण, अनुदान, एजेंसी समुदाय और नागरिकता

उद्देश्य:

  1. एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) और ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवसों (VHND) में किशोरों की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना 
  2. AFHC सेवाओं के लिए सूचना शिक्षा संप्रेषण/व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण हेतु बजट आवंटन

मुख्य परिणाम: इस परियोजना में भगवानपुर प्रखंड के 10 पंचायतों पर ध्यान दिया गया था।  

10 पंचायतों के 50 फ्रंटलाइन वर्कर पर एक सर्वेक्षण किया गया, जिससे कि यह समझा जा सके कि वे किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं और योजनाओं के बारे में क्या समझते हैं। निष्कर्षों से पता चला कि कोई एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक नहीं चल रहा और कोई स्वास्थ्य दिवस आयोजित नहीं किए जा रहे थे। इन्हें UDAYA अध्ययन के निष्कर्षों के विरुद्ध रखा गया और फ्रंटलाइन वर्कर को इसके बारे में बताया गया। इसके आधार पर, 10 पंचायतों के फ्रंटलाइन वर्कर ने अपने पंचायत के आँगनवाड़ी केंद्रों में किशोरी स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए। यहाँ उन्होंने लड़कियों की स्वास्थ्य जाँच की, जिसमें वजन, ऑक्सीजन स्तर की जाँच शामिल थी; मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जानकारियाँ दी; और IFA टैबलेट बाँटे।

10 पंचायतों की किशोरियों के साथ पक्ष समर्थन कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जहाँ उन्हें UDAYA डेटा के बारे में बताया गया और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उनके लिए मिलने वाले अनुदानों की जानकारी दी गई। इस समूह की 55 लड़कियों ने कई अनुशंसाएँ तैयार की और माँगपत्र पर हस्ताक्षर किया। उन्होंने RKSK और अपने स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी योजनाओं के बारे में और जानकारी माँगी; और आशा तथा एएनएम को भी किशोरों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं में सहयोग हेतु प्रशिक्षण देने के लिए कहा। यह पत्र स्वास्थ्य शिविर के दिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा गया। 

डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी ने इन अनुशंसाओं को स्वीकार किया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स को विनियमित करने के लिए एक पत्र जारी किया। वर्तमान में, इसका हर महीने एक दिन खुलना शुरू हो गया है और एक एएनएम वहाँ परामर्शदाता के रूप में बैठती है।

प्रक्रिया: इस परियोजना में दो मुख्य डेटा पॉइन्ट का उपयोग किया गया। एक RKSK कार्यक्रम, विशेषकर AFHC क्लीनिक की स्थिति और कार्यान्वयन। दूसरा पॉइन्ट किशोरियों के लिए योजना का कार्यान्वयन, खासतौर से हर सप्ताह आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक (WIFS) देना। ये डेटा पॉइन्ट इसलिए चुने गए, क्योंकि इनसे पता चला कि किशोरों को जरूरी SRH जानकारी और सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। उदाहरण के लिए, वहाँ कोई AFHCs नहीं चल रहा था और न स्वास्थ्य दिवस आयोजित किए जा रहे थे। अंतःक्षेप ने किशोरियों से संबंधित विषयों को प्राथमिकता दी।

डेटा का उपयोग फ्रंटलाइन वर्कर, जैसे आशा और एएनएम से; प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों से और स्वयं किशोरियों से बातचीत शुरू करने के लिए किया गया। फ्रंटलाइन वर्कर और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए, इस डेटा को देखने से सेवा प्रदायगी में खामियों को जानने में मदद मिली और वास्तव में उन्होंने माना कि वे किशोरों को जरूरी सेवाएँ प्रदान करने से चूक गए हैं। वे डेटा के प्रति संवेदनशील थे और सेवा प्रदायगी की खामियों को दूर करने के लिए उत्सुक थे। फ्रंटलाइन वर्कर ने खास तौर से दर्शाया कि वे गर्भवती स्त्रियों और नयी माँओं को सेवाएँ प्रदान करने पर ही ध्यान देती रही हैं, किशोरों का स्वास्थ्य पीछे छूटता रहा है। विभिन्न बैठकों में, UDAYA अध्ययन के डेटा का उपयोग इसे स्तानीय उदाहरण के द्वारा दर्शाते हुए सरलीकृत करके किया गया, ताकि समुदाय स्वयं को इससे जोड़कर देख सके।

 परियोजना ने फ्रंटलाइन वर्कर की कही बातों की UDAYA के निष्कर्षों से तुलना की, विशेष रूप से, उनसे, जो किशोरों से संबंधित थे। 10 पंचायतों के 50 फ्रंटलाइन वर्कर पर एक छोटा सा सर्वेक्षण किया गया, जिससे समझा जा सके कि वे किशोरों के स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे संबंधित योजनाओं से क्या समझते हैं। इसके बाद, फ्रंटलाइन वर्कर की एक बैठक में, इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष और UDAYA के डेटा दिखाए गए और इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि वास्तव में वहाँ किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं में कई खामियाँ थी। इस प्रक्रिया से प्रत्येक फ्रंटलाइन वर्कर को अपने पंचायत में एक योजना बनाने और अपने पंचायत के आँगनवाड़ी केंद्रों में किशोरी स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

साथ ही, किशोरियों के साथ कार्यशालाएँ आयोजित की गई, जिससे RKSK के माध्यम से चलाई जा रही सेवाओं के मामले में उनकी जानकारी के स्तर को मापा जा सके। अधिकांशतः लड़कियाँ केवल इतना जानती थी कि उन्हें IFA टैबलेट मिलना चाहिए; उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौरान यह बंद हो गया। वे किसी अन्य संबंधित सेवा के बारे में नहीं जानती थीं और उन्होंने बताया कि न तो उनके माता-पिता, न ही फ्रंटलाइन वर्कर ने ही उन्हें स्वास्थ्य अथवा यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में उन्हें कोई जानकारी दी। ये किशोरियाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शायद ही कोई स्वास्थ्य सेवा लेने जाती हों, क्योंकि लोग उनके अस्पताल जाने को बड़ी ही जिज्ञासा या शर्म की दृष्टि से देखते हैं। विशेषकर युवतियों के लिए, समुदाय के लोग उनके इस व्यवहार पर लांक्षण लगाते रहते हैं। लड़कियों के लिए कार्यशालाएँ आयोजित किए जाने के बाद, उन्होंने PHC जाना और एएनएम तथा आशा से जरूरी जानकारी या सेवाओं के बारे में बात करना शुरू किया। किशोरी स्वास्थ्य शिविर इन वार्तालापों को शुरू करने और किशोरियों तथा फ्रंटलाइन वर्कर के बीच जान-पहचान होने के अवसर के रूप में भी सामने आए।

परियोजना का तीसरा चरण किशोरियों को PHC ले जाना था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने UDAYA का डेटा देखने के बाद एक दिन का स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किया था। PHC के स्वास्थ्य अधिकारी इस ईवेंट को संचालित करने के लिए वास्तव में उत्सुक थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी लड़कियों की स्वास्थ्य जाँच की जाए; कुछ की कोविड जाँच और टीकाकरण भी हुआ।