अयोध्या, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: अफाक उल्लाह

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण

उद्देश्य: राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) की कवरेज बेहतर बनाना और ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHND) और एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) पर आवश्यक सेवाओं और वस्तुओं तक किशोरों की पहुँच सुनिश्चित करना। 

मुख्य परिणाम:  रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की, खासकर स्थानीय किशोरों के साथ, और UDAYA सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारियाँ तथा तथ्यपत्रक साझा किए। इन कार्यक्रमों की पहुँच 100 से ज्यादा किशोरों तक थी और उन्हें साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक (WIFS) तथा आयरन फॉलिक एसिड टेबलेट के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

400 किशोरों और समुदाय के सदस्यों के हस्ताक्षर वाले VHNDs और AFHCs की बेहतर सेवा प्रदानगी की माँग करने वाले पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया। 

इस अंतःक्षेप ने स्थानीय अधिकारियों को पाँच किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने के लिए प्रेरित किया, जहाँ लगभग 200 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अनुसार जानकारी और अनुदान दिए गए।  

परामर्शदाता ने मीडिया के साथ मीटिंग का आयोजन किया, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर UDAYA अध्ययन संबंधी जानकारी कम से कम पाँच मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई। 

प्रक्रिया: किशोर समूहों और व्यापक समुदाय के साथ आयोजित मीटिंग और ईवेंट्स में स्थानीय स्तर पर RKSK प्रोग्राम के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी और उत्तरवर्ती चर्चा से खुलासा हुआ कि एक लंबे समय से बकाया रहा प्रमुख अनुदान IFA टैबलेट की आपूर्ति था। 

कुछ महीने की अवधि में पाँच किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित किए गए, जिसमें नुक्कड़ नाटक, नारा लेखन प्रतियोगिता, हस्ताक्षर अभियान आदि चलाए गए। इन ईवेंट में 100 से ज्यादा किशोर शामिल हुए और विभिन्न योजनाओं में मिलने वाले अनुदानों से संबंधित जागरूकता सत्रों में भाग लिया। जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी, जैसे RKSK नोडल अधिकारी भी इन ईवेंट में आमंत्रित थे और ईवेंट में स्वास्थ्य जाँच, रक्ताल्पता की जाँच और काउंसलिंग हुआ। 

कुल 11 एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक (AFHCs) में से केवल चार मौजूद थे, और उनमें भी कर्मचारियों की कमी थी। सामुदायिक बैठकों के बाद किशोरों के समूहों ने बेहतर सेवा प्रदायगी की माँग को लेकर AFHC पर नियमित रूप से जाना शुरू किया। ये प्रयास संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकों और बातचीत के साथ संयुक्त रूप से चल रहे थे, जिसमें वास्तविक धरातल की सच्चाइयाँ बताने के लिए KSK नोडल पर्सन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम नोडल पर्सन, बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO), जिला परियोजना अधिकारी, AFHC काउंसलर और मीडियाकर्मी उपस्थित थे। 

VHNDs और AFHCs की सेवा प्रदायगी को मजबूती प्रदान करने संबंधी अनुशंसाओं वाले एक पत्र की रूपरेखा तैयार की गई। इस पर लगभग 400 किशोरों और उनके अभिभावकों ने हस्ताक्षर किया। यह पत्र जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। हालांकि अनुशंसा पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार कर लिया, लेकिन अभी तक IFA की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई लिखित आदेश या वास्तव में बेहतर सेवा प्रदायगी संबंधी कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है। 

कोविड-19 RKSK कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ, जब कर्मचारी और बजट का उपयोग कोविड-19 के इलाज और राहत के लिए होने लगा।

आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: राजदेव चतुर्वेदी 

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHNDs), एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) और स्वास्थ्य मंच (स्कूल स्तर) जैसे मौजूदा मंचों को मजबूत करके स्वास्थ्य और पोषण संबंधी विषयों पर किशोरों के लिए काउंसलिंग को बेहतर बनाना।  

मुख्य परिणाम

इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की, खासकर स्थानीय किशोरों के साथ, और UDAYA सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारियाँ तथा तथ्यपत्रक साझा किए। इन कार्यक्रमों की पहुँच 100 से ज्यादा किशोरों तक थी और उन्हें साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसित अनुपूरक (WIFS) तथा आयरन फॉलिक एसिड टेबलेट के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

इस अंतःक्षेप से स्थानीय अधिकारियों को चार किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने की प्रेरणा मिली, जहाँ लगभग 100 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) प्रोग्राम के अनुसार जानकारियाँ और सरकार द्वारा समर्थित अनुदान प्राप्त हुआ। 

इस अंतःक्षेप से स्थानीय अधिकारियों को चार किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने की प्रेरणा मिली, जहाँ लगभग 100 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) प्रोग्राम के अनुसार जानकारियाँ और सरकार द्वारा समर्थित अनुदान प्राप्त हुआ। 

परामर्शदाता ने सेवा प्रदायगी में शामिल विभिन्न अधिकारियों, जैसे प्रखंड स्तर सेवा प्रदाता, सरकारी अधिकारी, स्कूल के प्राचार्यों आदि की किशोरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठकें भी आयोजित की, जिससे कि वे अपनी आवश्यकताओं, सुझावों और आजमगढ़ के अत्रौला और अहरौला प्रखंडों में सेवा प्रदायगी में खामियों पर चर्चा कर सकें। 

प्रक्रिया: 

किशोरों के साथ बैठकों में UDAYA के आँकड़ों से प्राप्त जानकारियाँ दी गई और उन पर चर्चा की गई। आजमगढ़ में कुपोषण की दर बहुत अधिक है और समुदाय निगरानी कार्यों से इसके विभिन्न कारणों का पता चला है – जैसे रक्ताल्पता, गरीबी और पोषण की पहुँच में कमी तथा कम उम्र में विवाह और गर्भावस्था। किशोरों में WIFS की सेवा प्रदायगी, कीड़े मारने की दवा लेने और टीकाकरण में कमियाँ हैं। हालांकि वहाँ दो AFHCs हैं, किशोर केवल कुछ बैठकों में शामिल हुए थे। इन निष्कर्षों को संकलित कर एक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए अनुशंसाएँ शामिल हैं। 

अंतःक्षेप ने दोनों प्रखंडों में किशोरों और फ्रंटलाइन वर्कर (FLWs) तथा प्रखंड स्तर के सेवा प्रदाताओं के बीच कई बैठकें आयोजित की, ताकि आवश्यकताओं, सुझावों तथा सेवा प्रदायगी में खामियों पर चर्चा की जा सके, जिससे दोनों चयनित प्रखंडों में चार स्कूलों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए अनुदान प्राप्त हुआ। लगभग 100 किशोर इन स्वास्थ्य शिविरों में आए और RKSK के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा जिला स्तर के कार्यक्रम अधिकारियों को इस गतिविधि की एक रिपोर्ट भेजी गई, जिससे कि सभी प्रखंडों में इस मंच का नियमन किया जा सके।  

इसके साथ ही, किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी विषयों हेतु बेहतर सेवा प्रदायगी का अनुरोध करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था। सामुदायिक निगरानी से प्राप्त डेटा संबंधी जानकारियाँ और अनुशंसाएँ समुदाय के सदस्यों से साझा की गई, खासकर किशोरों, महिलाओं और युवाओं से। हस्ताक्षर अभियान काफी सफल रहा, क्योंकि माँग पत्र को न सिर्फ स्थानीय समुदाय, बल्कि अस्पताल और AHFC के कर्मचारियों से भी प्रोत्साहन मिला। किशोरों द्वारा जारी किए गए माँग पत्र पर लगभग 100 लोगों ने हस्ताक्षर किया। अनुशंसा पत्र को औपचारिक रूप से प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने स्वीकार किया। युवाओं का एक प्रतिनिधि मंडल जिला कार्यक्रम प्रबंधक – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय से भी मिला, जहाँ किशोरों ने अपनी आवश्यकताओं, कमियों और अनुशंसाओं को प्रस्तुत किया। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी में भी उभरते मुद्दों को उठाने के लिए ऐसी ही प्रस्तुति और चर्चा हुई। प्रस्तुत अनुशंसाओं को डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की बैठक में स्वीकार किया गया। कार्यान्वयन हेतु त्रैमासिक योजना में इन अनुशंसाओं को शामिल किया जाना सुनिश्चित कराने के लिए फॉलो अप विजिट आवश्यक है। 

कोविड-19 और इसके कारण हुए लॉकडाउन से इस अंतःक्षेप के प्रयासों को बहुत नुकसान पहुँचा है। वित्तीय और मानव सहित सभी संसाधनों को कोविड-19 के संक्रमणों की दर में कमी लाने के लिए लगा दिया गया था। हालांकि अधिकारी किशोरों की माँगों और अनुशंसाओं का समर्थन करना चाहते हैं, लेकिन राज्य स्तरीय अधिकारी अभी भी कोई भी अनुदान नहीं दे रहे हैं।

बहराइच, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: देवयानी चतुर्वेदी 

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: आँगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में सैनिटरी नैपकिन और IFAs की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना और ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHNDs) को किशोरों के लिए अनुकूल बनाना, जिसमें किशोरों के लिए विशेष सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जैसे रक्ताल्पता की जाँच, काउंसलिंग, वस्तुओं और रेफरल का वितरण।

मुख्य परिणाम: इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय, विशेषकर स्थानीय किशोरों के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की। बहराइच जिले के नवाबगंज प्रखंड के 10 गाँवों की 100 किशोरियों का चुनाव किया गया था और उन्हें ‘स्थानीय चैम्पियन’ बनने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। 

लड़कियों को डिजिटल विमर्श के लिए प्रशिक्षित किया गया, जिससे कि वे अपने मुद्दों को विभिन्न स्थापित हेल्पलाइन और पोर्टल, जैसे चीफ मिनिस्टर हेल्पलाइन-1076, चाइल्ड लाइन – 1098, IRGS पोर्टल, जन सुनवाई आवेदन, सरकारी अधिकारियों के CUG नंबर और सरकारी अधिकारियों को लिखित आवेदन आदि के द्वारा उठा सकें। किशोरों ने इन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और इसकी स्थिति को ट्रैक करना तथा इसका फॉलो अप लेना सीखा।

अंतःक्षेप ने चैम्पियन और जिला स्तरीय अधिकारियों, जैसे जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी-ICDS के बीच बैठकें भी आयोजित की, जिससे उन्हें डिस्ट्रिक हेल्थ सोसायटी की बैठकों में अपने मुद्दों से संबंधित अनुशंसाएँ रखने की सुविधा मिली। 

प्रक्रिया: नवाबगंज के 10 गाँवों की किशोरियों के साथ बैठक में उन्हें UDAYA के आँकड़ों तथा अन्य जानकारियों के बारे में बताया गया। स्वास्थ्य और पोषण जैसे थीम का उपयोग कुपोषण और रक्ताल्पता के मामलों और VHNDs जैसे कार्यक्रमों के महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए उपयोग में लाए जाते थे, जिनमें किशोरों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता था। 25 लड़कियों के 4 बैच ने इन आरंभिक बैठकों में भाग लिया।

उसके बाद बैठकों में लड़कों को भी शामिल किया गया और उन्होंने अपने समुदाय में रक्ताल्पता या नियमित रूप से रक्ताल्पता की जाँच होने या IFA टैबलेट की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा किया। उन्होंने एक स्थिति विवरणी तैयार की और प्रखंड तथा जिला स्तर के अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में अनुशंसाओं का सुझाव दिया। किशोरों को बेहतर सेवा प्रदायगी की अपनी माँगों को अग्रेषित करने के लिए डिजिटल टूल का उपयोग करने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने 12 से 20 वर्ष की आयु की 10 ‘बालिका चैम्पियन’ का भी चयन किया।

चैम्पियनों ने AWCS में IFA टैबलेट और सैनिटरी पैड की अनियमित आपूर्ति का मुद्दा प्रखंड और जिला अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी-ICDS सहित जिला स्तर के अधिकारियों के समक्ष उठाया। उन्होंने चीफ़ मिनिस्टर हेल्पलाइन -1076, चाइल्ड लाइन-1098, इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम/एकीकृत शिकायत निपटान प्रणाली (IGRS) पोर्टल, जन सुनवाई आवेदन तथा सरकारी अधिकारियों के क्लोज्ड यूज़र ग्रुप (CUG) नंबर जैसे मौजूदा चैनलों का भी उपयोग किया। उन्होंने अधिकारियों को लिखित आवेदन भी भेजा और ऑनलाइन आवेदन की स्थिति ट्रैक किया। किशोरों के मुद्दे और उनके द्वारा की गई अनुशंसाएँ डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी (DHS) की बैठक में भी उठाए गए। DHS की तरफ से पूरे प्रखंड में AWCs को सैनिटरी नैपकिन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का मौखिक आश्वासन दिया गया। IFA टैबलेट की आपूर्ति में पहले ही सुधार हो चुका है। अधिकारियों ने प्रखंड में VHND में किशोरों के लिए अधिक अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का भी मौखिक वादा किया।

एक सबसे बड़ी चुनौती व्यापक जनसमुदाय के बीच माहवारी/मासिक धर्म और उससे संबंधित स्वच्छता जैसे विषय पर बात करना भी है। आरंभिक बैठकों में केवल किशोरियों को आमंत्रित किया गया था, बाद में बैठकों में लड़कों को भी शामिल किया गया। कई महीने और कई सत्र बाद, अब जाकर लड़कियाँ अपने अनुभव खुलकर बताती हैं और लड़के किशोर प्रतिनिधि मंडल में पहल करते हैं।

चंदौली, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: बिंदु सिंह

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण

उद्देश्य: जिले के एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) में सेवा प्रदायगी और गुणवत्ता में सुधार लाना और किशोरियों में मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता के विषय पर काउंसलिंग तथा जानकारियों के प्रसार में सुधार लाना।

मुख्य परिणाम: इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय के किशोरों के समूहों के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की, जिसमें किशोरों का नियमित और गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदायगी की माँग लेकर AFHCs पर जाना भी शामिल था। 

इस अंतःक्षेप ने चंदौली के दो प्रखंडों के 20 गाँवों की किशोरियों के साथ काम किया, ताकि VHNDs की निगरानी की जा सके और संकलित रिपोर्ट को पत्र के रूप में भेजा गया, जिसमें AFHCs और VHNDs में बेहतर सेवा प्रदायगी की माँग की गई। यह पत्र जिला स्तर के अधिकारियों, जैसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, RKSK नोडल अधिकारी तथा डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की बैठकों में भेजा गया। जिलाधिकारी ने सेवाओं में सुधार का मौखिक आश्वासन दिया। AFHCs में काउंसलिंग के लिए एक छोटा सा कमरा आवंटित किया गया और एक स्थानीय एनजीओ से अनुरोध किया गया कि वे साप्ताहिक आधार पर स्वैच्छिक महिला परामर्शदाता की सेवा देकर सहयोग करें।

इस अंतःक्षेप ने स्थानीय पंचायत चुनाव के विजेताओं को भी किशोरों के स्वास्थ्य से जुड़े अपने वादों को पूरा करने के लिए तथा एक कार्ययोजना तैयार करने के लिए प्रेरित किया। पंचायत स्थानीय विद्यालय में एक इंसिनेरेटर लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

परामर्शदाता ने मीडिया के साथ बैठकें आयोजित की, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय मीडिया में UDAYA अध्ययन के बारे में जानकारी देने वाली कई मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हो रही हैं। 

प्रक्रिया: किशोरों के समूहों और व्यापक जन-समुदाय के साथ आयोजित कई बैठकों और ईवेंट में मिली जानकारी और बाद में AFHCs जाने से पता चला कि वहाँ कोई महिला परामर्शदाता नहीं है और काउंसलिंग के लिए कोई कमरा भी आवंटित नहीं है। 

इसके साथ ही, चंदौली के दो प्रखंडों के 20 गाँवों की किशोरियों ने ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHNDs) की सेवा प्रदायगी की स्थिति पर डेटा एकत्र किया, जिसमें मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया था। इस सामुदायिक निगरानी कार्य से पता चला कि वहाँ टीकाकरण, आयरन फॉलिक एसिड टैबलेट या सैनिटरी नैपकिन के वितरण के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने प्राप्त जानकारियों पर एक रिपोर्ट तैयार की। 

हाल के पंचायतों के चुनाव के पहले, विभिन्न उम्मीदवारों ने किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम हेतु बेहतर सेवा प्रदायगी को लेकर कई वादे किए थे। चुनावों के बाद, अंतःक्षेप ने विजेता उम्मीदवारों के साथ बैठकें आयोजित की। पंचायत सदस्यों ने सेवा प्रदायगी में सहयोग हेतु अपनी भूमिका को जाना और स्थानीय स्कूल में इन्सिनेरेटर लगाने के लिए प्रतिबद्धता दर्शायी। 

UDAYA डेटा, RKSK दिशानिर्देशों और सामुदायिक रिपोर्ट की प्रतियाँ भी डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, जिलाधिकारी और मीडिया को भेजी गई। किशोर भी AFHCs पर जानकारी लेकर नियमित रूप से जाने लगे, जिसे वे कार्यक्रम के सेवा प्रदायगी में लगे फ्रंटलाइन वर्कर को दे सकें। वर्तमान में, पत्रों को सरकारी विभागों के विभिन्न स्तरों पर स्वीकार कर लिया गया है और जिलाधिकारी ने मौखिक रूप से वादा किया है कि वे बेहतर सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करेंगे। AFHCs में काउंसलिंग के लिए छोटा सा कमरा भी आवंटित कर दिया गया है और साप्ताहिक आधार पर एक स्वैच्छिक महिला परामर्शदाता की उपलब्धता हेतु एक स्थानीय एनजीओ से अनुरोध किया गया है। मीडिया के विभिन्न धड़ों ने भी काफी रुचि लिया और स्थानीय समाचारपत्रों में कई रिपोर्ट प्रकाशित हुए, जिसमें जिले में AFHCs की स्थिति, राज्य और जिला स्तर पर मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता की स्थिति, कार्यक्रम के कार्यान्वयन में कमियों तथा UDAYA के डेटा से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारियों को दर्शाया गया।

हमीरपुर, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: देवेंद्र गाँधी 

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) की कवरेज बेहतर बनाना और ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHND) और एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) पर आवश्यक सेवाओं और वस्तुओं तक किशोरों की पहुँच सुनिश्चित करना।

मुख्य परिणामइस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय के साथ कई मीटिंग और कार्यशालाएँ आयोजित की, खासकर स्थानीय किशोरों के साथ, और UDAYA सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारियाँ तथा तथ्यपत्रक साझा किए। इन कार्यक्रमों की पहुँच 100 से ज्यादा किशोरों तक थी और उन्हें साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक (WIFS) तथा आयरन फॉलिक एसिड टेबलेट के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

400 किशोरों और समुदाय के सदस्यों के हस्ताक्षर वाले VHNDs और AFHCs की बेहतर सेवा प्रदानगी की माँग करने वाले पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी और RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया। 

इस अंतःक्षेप ने स्थानीय अधिकारियों को पाँच किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने के लिए प्रेरित किया, जहाँ लगभग 200 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अनुसार जानकारी और अनुदान दिए गए।  

परामर्शदाता ने मीडिया के साथ मीटिंग का आयोजन किया, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर UDAYA अध्ययन संबंधी जानकारी कम से कम पाँच मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई। 

प्रक्रिया: किशोर समूहों और व्यापक समुदाय के साथ आयोजित मीटिंग और ईवेंट्स में जानकारी मिली और उत्तरवर्ती चर्चा से खुलासा हुआ कि अधिकांश किशोरों ने स्थानीय स्तर पर RKSK प्रोग्राम के बारे में कभी सुना ही नहीं था और वे उन विशेष प्रदत्त वस्तुओं के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक थे, जो उनके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए था। अंतःक्षेप ने AFHCs पर किशोरों की एक विजिट भी आयोजित की। 

कुछ महीने की अवधि में पाँच किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित किए गए, जिसमें नुक्कड़ नाटक, नारा लेखन प्रतियोगिता, हस्ताक्षर अभियान आदि चलाए गए। इनमें 200 से ज्यादा किशोरों ने भाग लिया और प्रदत्त वस्तुएँ प्राप्त किया। कुछ ही समय बाद, कोविड-19 के संक्रमण की दूसरी लहर के चलते शिविरों को स्थगित कर दिया गया और इसके बाद लॉकडाउन लग गया। फिर भी, इस पहल में इस अवसर का उपयोग सामुदायिक निगरानी प्रयास के लिए किया गया, जिससे पता चला कि किशोरियों को अब सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति नहीं की जा रही है। अक्सर यह स्कूलों के माध्यम से प्रदान किया जाता था, लेकिन लॉकडाउन लगने पर कोई भी लड़की स्कूल नहीं जा रही थी, न तो राजकीय अधिकारी सैनिटरी नैपकिन की अधिप्राप्ति और वितरण के लिए अनुदान जारी कर रहे थे। 

VHNDs और AFHCs की सेवा प्रदायगी को मजबूती प्रदान करने संबंधी अनुशंसाओं वाले एक पत्र की रूपरेखा तैयार की गई। इस पर लगभग 400 किशोरों और उनके अभिभावकों ने हस्ताक्षर किया। यह पत्र जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। इस अनुशंसा पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार कर लिया | 

वर्तमान में, जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी सेवा प्रदायगी की खामियों को जानते हैं और सार्वजनिक बैठकों में उन्होंने समुदाय द्वारा अग्रेषित कई अनुशंसाओं को स्वीकार किया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने RKSK कार्यक्रम के बेहतर कार्यान्वयन का फॉलो अप लेने का मौखिक आश्वासन भी दिया है।

ललितपुर, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: सुधीर त्रिपाठी 

डेटा थीम: अनुदान 

उद्देश्य: किशोरों के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHND) में परिवार नियोजन हेतु काउंसलिंग की गुणवत्ता में सुधार लाना, जिसमें परामर्शदाता का प्रखंड स्तर पर और सुदूर क्षेत्रों में पहुँचना तथा इसके अतिरिक्त ललितपुर जिला को पीयर एजुकेटर जिला में जोड़ना शामिल है। 

मुख्य परिणाम: अंतःक्षेप ने पाँच चयनित गाँवों में किशोर-किशोरियों के समूहों के साथ बैठकें आयोजित की, जिसके परिणामस्वरूप किशोर ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHND) पर आने लगे और पांच VHNDs पर उपलब्ध विभिन्न गतिविधियों पर अनुशंसाओं सहित एक रिपोर्ट तैयार किया। 

अंतःक्षेप ने किशोरों के समूहों और विभिन्न अधिकारियों तथा सेवा प्रदाताओं, जैसे जिला और प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों और फ्रंटलाइन वर्कर के बीच पक्ष समर्थन बैठकें आयोजित कराई, ताकि किशोर अपने निष्कर्ष और अनुशंसाएँ प्रस्तुत कर सकें। अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन अभी तक इनका कार्यान्वयन नहीं किया गया है। 

परामर्शदाता ने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों के साथ पक्ष समर्थन बैठकें आयोजित किया। कुछ उम्मीदवार किशोरों के स्वास्थ्य को अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाने के लिए सहमत हैं। 

प्रक्रिया:  आरंभिक बैठकों में, किशोरों ने UDAYA के आँकड़ों और उनके लिए उपलब्ध काउंसलिंग की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने अभी उपलब्ध विभिन्न परिवार नियोजन विधियों पर, परिवार नियोजन की पहुँच संबंधी समस्याओं पर भी चर्चा की और स्थानीय स्तर की जानकारी तथा आँकड़े एकत्र करने के लिए समुदाय स्तर पर निगरानी कार्य की रूपरेखा तैयार की। 

किशोरों द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पाँच गाँवों में पाँच VHNDs पर निगरानी तथा दस्तावेजीकरण गतिविधियों के लिए जाया गया है। उनके निष्कर्षों पर एक रिपोर्ट तैयार की गई और बेहतर परामर्श तथा सुदूरवर्ती पहुँच वाले परामर्शदाता की माँग करते हुए एक पत्र भी लिखा गया था। इसके बाद, किशोरों का प्रतिनिधि मंडल विभिन्न जिलों और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों, जैसे सेवा प्रदाताओं और परामर्शदाताओं से मिला। वे निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों से भी मिले। प्रतिनिधि मंडल ने UDAYA डेटा, VHNDs पर काउंसलिंग की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएँ तथा बेहतर काउंसलिंग सेवाओं के अनुरोध हेतु अपने पत्र सौंपे। प्रतिनिधि मंडल को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और उनकी अनुशंसाओं को अधिकांश अधिकारियों ने प्राप्त और स्वीकार किया। सच कहें तो सेवा प्रदाताओं तथा परामर्शदाताओं से बैठकों में सेवा प्रदायगी तथा वितरण में उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दिया गया और किशोरों की अनुशंसाओं के साथ उनकी अनुशंसाओं को भी इसमें शामिल किया गया। 

किशोरों के प्रतिनिधि मंडल ने डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की बैठक, तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (MOIC) और जिलाधिकारी (DM) को भी उपरोक्त पत्र और रिपोर्ट सौंपे। इन सभी अधिकारियों ने किशोरों के लिए बेहतर परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित करने का मौखिक वादा किया। चुनाव में खड़े होने वाले कुछ उम्मीदवारों ने भी इसके लिए समर्थन देने का आश्वासन दिया है और बेहतर परामर्श सेवाओं एवं किशोरों की स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी में सामान्य सुधार को प्रचार अभियान की प्रतिबद्धता के तौर पर पेश करने का वादा किया है। 

कोविड-19 और उसके बाद होने वाला लॉकडाउन इस अंतःक्षेप के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर आया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कोविड-19 के राहत एवं प्रबंधन कार्य में व्यस्त हो गए। लॉकडाउन का दूसरा बड़ा भयंकर प्रभाव यह था कि बाल विवाहों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सामुदायिक सूचनाओं के अनुसार, अवयस्कों के विवाह की दर लगभग दोगुनी हो गई। स्कूल बंद थे तो आवश्यक वस्तुओं, जैसे IFA टैबलेट या सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं कराए जा सके। फिर भी, किशोरों का प्रतिनिधि मंडल प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों से बेहतर सेवा प्रदायगी सुनिश्चित कराने के लिए फॉलो अप लेने के लिए प्रतिबद्ध रहा।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ, उत्तर प्रदेश 

परामर्शदाता: रजनी और श्रद्धा  

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण

उद्देश्य: राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के कवरेज को बेहतर बनाना और किशोरों के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवसों (VHND) तथा एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) पर आवश्यक सेवाओं तथा वस्तुओं के लिए पहुँच सुनिश्चित करना। 

मुख्य परिणाम: इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने समुदाय, विशेषकर स्थानीय किशोरों के साथ कई बैठकें और कार्यशालाएँ आयोजित की और UDAYA सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारियाँ और तथ्यपत्रक साझा किए, जिसकी पहुँच 100 से ज्यादा किशोरों तक थी। इसमें उन्हें साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक (WIFS) तथा आयरन फॉलिक एसिड टैबलेट के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

इस अंतःक्षेप ने एडॉलेसेंट फ्रेंडली हेल्थ क्लीनिक्स (AFHCs) पर किशोरों को जाने के लिए प्रेरित किया; 10-15 किशोरों के दलों में वे तीन बार AFHCs गए, जिससे कि सेवाओं की गुणवत्ता को समझ सकें। to understand the quality of services. VHNDs और AFHCs पर बेहतर सेवा प्रदायगी की माँग के लिए एक पत्र लिखा गया, जिस पर 400 से अधिक किशोरों तथा समुदाय के सदस्यों ने हस्ताक्षर किया और उस पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया। 

इस अंतःक्षेप ने स्थानीय अधिकारियों को पाँच किशोर स्वास्थ्य दिवस आयोजित करने के लिए प्रेरित किया, जहाँ लगभग 200 किशोरों को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अनुसार जानकारी और अनुदान दिए गए।  

परामर्शदाता ने मीडिया के साथ मीटिंग का आयोजन किया, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर UDAYA अध्ययन संबंधी जानकारी कम से कम पाँच मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई। 

प्रक्रिया: किशोरों के समूहों और व्यापक जनसमुदाय के साथ आयोजित बैठकों में RKSK कार्यक्रम के स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी गई और उसके बाद चर्चा की गई, जिसका ग्राम्य स्तर पर RKSK कार्यान्वयन की स्थिति तथा AFHCs पर सेवा प्रदायगी की उपलब्धता तथा उनकी स्थिति पर निगरानी करने पर पता चला।  

सामुदायिक निगरानी कार्य में किशोरियों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आँगनवाड़ी जाना शामिल है। इस कार्य से पता चला कि जबकि किशोरों को एएनएम और आशा कर्मियों जैसे फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों (FLWs) के बारे में पता था, बहुतों को अपने इलाके में इनमें से किसी से कभी मुलाकात नहीं हुई थी। अभी लड़कियाँ FLWs से नियमित संपर्क में रहती हैं और नियमित रूप से टीका, कैल्शियम की गोलियाँ और रक्ताल्पता जाँचों का लाभ प्राप्त कर रही हैं।   

लड़कियाँ AHFCs भी गईं। अभी दो लखनऊ में बलरामपुर हॉस्पिटल और क्वीन्स मैरीज मेडिकल कॉलेज में मौजूद हैं। किसी भी AFHC में परामर्शदाता उपलब्ध नहीं थे। ये क्लीनिक लड़कियों के निवास स्थान से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर हैं और आसानी से या सहजता से यहाँ पहुँचना किशोरियों के लिए कठिन था। AFHCs के कर्मचारी मददगार, सहायता के लिए इच्छुक थे और उन्होंने लड़कियों के साथ कई बैठकों में भाग लिया। कर्मचारियों की कमी तथा विभिन्न जिम्मेदारियों के बावजूद, AFHC कर्मचारी ने अब एक महिला परामर्शदाता की व्यवस्था कर ली है, जो अब समुदाय के किशोर किशोरियों से मिलती हैं। 

व्यापक जनसमुदाय में कई सामुदायिक ईवेंट भी RKSK कार्यक्रम के कार्यान्वयन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाए गए थे। इन ईवेंट में मनोरंजक गतिविधियाँ, जैसे नुक्कड़ नाटक, नारा लेखन प्रतियोगिताएँ और अन्य प्रतियोगिताएँ शामिल थीं। RKSK, VHNDs और AFHCs की सेवा प्रदायगी को मजूबती देने संबंधी अनुशंसाओं को लेकर एक पत्र भी लिखा गया था। इस पर 400 से अधिक किशोरों तथा उनके माता-पिता ने हस्ताक्षर किया था। यह पत्र जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था, जो ईवेंट में आमंत्रित थे। 

इस अंतःक्षेप ने RKSK के कार्यान्वयन से जुड़े विभिन्न स्थानीय तथा प्रखंड स्तर के अधिकारियों के पास किशोरों को जाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष UDAYA का डेटा तथा व्यापक जनसमुदाय द्वारा समर्थित एक अनुशंसा पत्र सौंपा। अनुशंसा पत्र को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और RKSK नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया।

कोविड-19 और इसके बाद लगे लॉकडाउन अनुदानों और सेवा प्रदायगी की उपलब्धता की राह में सबसे बड़ी बाधा रहे। लॉकडाउन का एक त्वरित प्रभाव यह रहा कि आपूर्तियों की अधिप्राप्ति और कर्मचारियों की उपलब्धता में भारी कमी आ गई। उदाहरण के लिए, लगभग दो साल तक कोई IFA टैबलेट, पेट के कीड़े मारने की दवा, सैनिटरी नैपकिन नहीं प्रदान किए गए या रक्ताल्पता की जाँच नहीं की गई। फिर भी, इस अंतःक्षेप ने स्थानीय किशोरों और जिला के अधिकारियों को निकट भविष्य में स्थानीय सेवा प्रदाताओं से मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया, जिससे VHNDs का मूल्यांकन और उसमें सुधार लाया जा सके और उन्हें किशोरों के लिए अधिक अनुकूल बनाया जा सके।     

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

परामर्शदाता: नीति

डेटा थीम: अनुदान, स्वास्थ्य और पोषण 

उद्देश्य: ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHNDs) में परामर्शदाताओं, फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर और प्रखंड स्तर के अधिकारियों से कंसल्टेशन में किशोरों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य परामर्श सेवा पर अधिक ध्यान देना।

मुख्य परिणाम: इस रणनीतिक अंतःक्षेप ने फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों और समुदाय के किशोरों के बीच कई बैठकें आयोजित की, जहाँ किशोरों की आवश्यकताओं, माँगों और अनुशंसाओं को समझने पर फोकस किया गया। 

युवा नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल VHNDs और AFHC की बेहतर सेवा प्रदायगी की माँग को लेकर, किशोरों और समुदाय के सदस्यों के 100 हस्ताक्षर वाला एक माँगपत्र सौंपने प्रखंड स्तर के विभिन्न अधिकारियों से भी मिले। किशोर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी जैसे अधिकारियों से मिले और उनसे अपने पंचायत के VHNDs आने और स्वयं परिस्थिति को देखने का अनुरोध किया। इसके बाद, अधिकारी VHNDs पर पहुँचे और VHNDs पर किशोरों के स्वास्थ्य तथा प्रजनन अधिकारों में सुधार लाने की मौखिक प्रतिबद्धता दर्शायी।

इस अंतःक्षेप ने जिला अधिकारियों के साथ बैठकों और पक्ष समर्थन के अवसरों की सुविधा के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस (VHNDs), किशोरों के लिए विभिन्न स्वास्थ्य शिविर और अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए। 

स्थानीय किशोरों को VHND पर राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अनुसार अनुदान एवं जानकारी प्रदान किए गए। स्वास्थ्य शिविरों में किशोरियाँ स्त्री रोग विशेषज्ञों से मिलीं। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के दिन कम से कम 50 किशोरों और युवाओं ने किशोरों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता से संबंधित जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लिया। 

प्रक्रिया:  किशोरों के स्वास्थ्य और प्रजनन अधिकारों पर मौजूदा कार्यों से संबंधित UDAYA डेटा को वाराणसी के एक प्रखंड के चार पंचायत के किशोरों की बैठकों में प्रस्तुत किया गया। डेटा से जमीनी सच्चाई की पुष्टि हुई और उसके बाद हुई चर्चा में किशोरों ने हिंसा, बालविवाह और जबर्दस्ती विवाह तथा VHNDs जैसे किशोरों के चार पंचायत के किशोरों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत मिलने वाली सेवाओं तक पहुँच और अनुदानों की उपलब्धता बनाए रखने पर ध्यान देने का निर्णय लिया।

किशोरों ने अपने समुदाय के लिए उपलब्ध सेवाओं की वर्तमान स्थिति को समझना शुरू किया और उसके बाद अनुशंसाओं सहित एक रिपोर्ट तैयार किया। इसके बाद समूह अपनी रिपोर्ट और अनुशंसाएँ देने और इस पर चर्चा करने के लिए फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों (FLWs) से मिला। 

इस अंतःक्षेप ने डेटा को व्यापक जनसमुदाय के सामने पेश करने के लिए भी किशोरों के लिए अवसर का सृजन किया, और बेहतर परामर्श सेवा की उनकी माँग को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त रूप से एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। समुदाय के लगभग 100 लोगों ने किशोरों की अनुशंसाओं का समर्थन किया।

किशोरों के समूह अपना पत्र देने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी का दायित्व रखने वाले प्रखंड स्तर के विभिन्न सरकारी अधिकारियों से भी मिले, जैसे प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि। उन्होंने अधिकारियों से अपने पंचायत के VHNDs पर आकर खुद परिस्थितियाँ देखने का आग्रह किया। इसके बाद, अधिकारी VHNDs पर आए और उन्होंने VHNDs पर किशोरों के स्वास्थ्य और प्रजनन अधिकारों पर बेहतर ध्यान देने का मौखिक वादा किया।

जिला के अधिकारियों के साथ बैठकों और पक्ष समर्थन के अवसरों के सृजन के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण दिवस, किशोरों के लिए कई चिकित्सा शिविर लगाने और अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। किशोरों को स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलने के अवसर के साथ ही जानकारी और अनुदान भी मिले। कम से कम 25 लड़कियों की नियमित स्वास्थ्य जाँच हुई और बहुतों के लिए यह किसी स्वास्थ्यकर्मी से मिलने का पहला अवसर था। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर, कम से कम 50 किशोरों और युवाओं ने किशोरों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जागरूकता बढ़ाने के कार्यक्रम में भाग लिया। कई अधिकारियों और FLWs ने सेवा की गुणवत्ता और सेवा प्रदायगी में सुधार हेतु सहयोग देने का आश्वासन दिया।