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इस परियोजना के बीच जो मुख्य उद्देश्य थे, उनमें से एक था जमीनी कार्रवाई और अंतःक्षेपों पर साक्ष्य की प्रासंगिकता और रूपरेखा तैयार करने की तिथि दर्शाना। परियोजना में जमीनी कार्रवाई पर एजेंडा की पहचान करने के लिए UDAYA अध्ययन की जानकारियों का उपयोग किया गया। इसमें भावी पहल को सूचित करने के लिए कुछ चुनौतियाँ और सीख प्रस्तुत की गई, जिससे जमीनी कार्रवाई को समर्थन देने के लिए डेटा मिल सके और डेटा आधारित कार्य हो सके। ये नीचे प्रस्तुत किए गए हैं:  

Use verified data as a benchmark: The UDAYA data proved extremely relevant and useful in different ways to further ongoing advocacy, especially when communicating with government officials. 

" जब भी मैं RKSK प्रोग्राम के प्रखंड या जिला समन्वयकों के पास जाता, आशा और एएनएम जैसे फ्रंटलाइन वर्कर या मीडिया के लोग भी वहाँ रहते, मैं उन्हें तथ्य पत्रक देता। इससे हम जो कहानियाँ साझा कर रहे थे, उसके पीछे के तथ्यों की ओर उनका ध्यान आकर्षित होता था।” ~ अफाक उल्लाह, अयोध्या 

डेटा को प्रासंगिक बनाने के लिए अनुकूलित और संदर्भीकृत करना: हालांकि UDAYA के डेटा ने राज्य स्तर पर स्थिति की व्यापक जानकारी दी, लेकिन प्रखंड और जिला स्तर पर काम करते हुए इस जानकारी को स्थानीय संदर्भों के लिए अनुकूलित किया जाना था। कई परामर्शदाताओं ने प्रासंगिक डेटा उपलब्ध होने के महत्व पर जोर दिया। अधिकांश अंतःक्षेपों में जमीनी स्तर पर डेटा की पुष्टि करने के लिए व्यापक सामुदायिक निगरानी पहल शामिल थी। किशोरों ने भी AFHC जाते या मांग पत्र जमा करते समय अपने दावों की पुष्टि करने के लिए डेटा का उपयोग किया। 

स्थानीय स्तर के संगठनों और अधिकारियों को शामिल करना: अधिकांश परामर्शदाताओं के लिए, डेटा की जानकारी का उपयोग करना बहुत उपयोगी था। उन्होंने सिफारिश की कि NGO, CBO और स्थानीय संगठन अपनी परियोजनाओं के लिए समुदायों और सरकारी अधिकारियों के साथ समान रूप से डेटा का उपयोग करें। वास्तव में, एक सुझाव यह था कि इस तरह के डेटा को गठबंधन और संगठनों के नेटवर्क के साथ साझा किया जाना चाहिए, प्रसार कार्यशालाओं के माध्यम से विभिन्न संगठनों को यह समझने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए कि वास्तव में डेटा का उपयोग कैसे किया जाए।

डेटा आधारित मांग करने और इसका समर्थन करने के लिए समुदाय के सदस्यों को शामिल करना: बहुत से परामर्शदाता डेटा एकत्रण प्रक्रियाओं में समुदायों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। किसी विशेष सेवा समुदायों या सेवा का उपयोग करने वाले समूहों पर डेटा एकत्र करते समय, उनसे संपर्क किया जाना चाहिए। 

एक अन्य परामर्शदाता ने सुझाव दिया कि समुदाय के युवाओं को कौन सा डेटा एकत्र किया जाना चाहिए, इससे संबंधित प्राथमिकता तय करने और डेटा एकत्र करने में भी शामिल किया जा सकता है। डेटा एकत्रण के मापदंडों को अंतिम रूप देने के लिए सामुदायिक दृष्टिकोण का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि अंतिम डेटा और उसका विश्लेषण उनके लिए उपयोगी हो। 

एक परामर्शदाता ने बताया कि आत्मविश्वास और अधिकारों के प्रति जागरूकता ने भी सरकारी अधिकारियों के साथ बेहतर संबंध बनाने में बहुत मदद की है। उन्होंने आगे कहा कि किशोरों की जिज्ञासा और सहयोग के दृष्टिकोण ने अधिकारियों को उनका सहयोग करने के लिए अधिक तैयार किया। 

"हमारा दृष्टिकोण गैर-टकराव वाला था। हमने कार्यक्रम में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को आश्वासन दिया कि यह एक साथ काम करने का अवसर है, और वे मदद और सहयोग पाकर खुश हैं।” 

विभिन्न हितधारकों को शामिल करने के लिए सार्वजनिक अंतःक्षेप का उपयोग करना: किशोर स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रमों जैसे अवसरों ने आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और ब्लॉक और जिला अधिकारियों जैसे फ्रंटलाइन वर्कर से जुड़ने के अधिक मनोरंजक और आकर्षक तरीके प्रदान किए, जिन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में आसानी से भाग लिया। कई अंतःक्षेपों में सामुदायिक डेटा एकत्र करने और जानकारियों के प्रसार का समर्थन करने के लिए फ्रंट लाइन वर्कर भी मौजूद थे और मानते हैं कि UDAYA के डेटा की जानकारी सामुदायिक जागरूकता के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, किशोरों से संबंधित मुद्दों को एक नया दृष्टि प्रदान करता है, और समुदाय की मांगों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य प्रदान करने हेतु महत्वपूर्ण है। 

RKSK नोडल अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी और मीडिया जैसे संबंधित अधिकारियों के साथ हमारी बातचीत आसान रहे, क्योंकि हमने UDAYA अध्ययन के डेटा की जानकारी प्रस्तुत करने के साथ शुरुआत की।" RKSK के सेवा प्रदायगी की जिला स्तर पर स्थिति को रेखांकित और रिपोर्ट करने के लिए डेटा की जानकारी का उपयोग करते हुए, स्थानीय समाचार पत्रों में कई मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई। ".  

डेटा का प्रसार सरल तरीके से और बड़े स्तर पर होना चाहिए: अंतःक्षेपों द्वारा किए गए डेटा प्रसार प्रक्रियाओं के बारे में परामर्शदाताओं के द्वारा कही गई बातें रोचक थी। उदाहरण के लिए, किसी ने जोर दिया कि डेटा को वास्तव में उपयोगी बनाने के लिए, इसे सरल और स्थानीय भाषाओं में प्रसारित किया जाना चाहिए। प्रसार के लिए कई रणनीतियां साझा की गई; एक अंतःक्षेप ने विभिन्न सामुदायिक समूहों के लिए डेटा की विशिष्ट जानकारी को उजागर करने के लिए व्हाट्सएप समूहों का उपयोग किया। एक अन्य परामर्शदाता का मानना ​​है कि उनके अंतःक्षेप के डिजिटल घटक से डेटा और इससे संबंधित चर्चाएँ सभी के लिए अधिक मज़ेदार और आकर्षक बन गई हैं। 

समुदाय, विशेष रूप से किशोरों के संदर्भ में पुराना डेटा थोपने का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए हमने चित्रसहित प्रस्तुतिकरण, वीडियो और ग्राफिक्स के उपयोग के बारे में सोचा, जो इसपर बातचीत को बढ़ावा देंगे। यहां तक ​​कि पाई चार्ट और ग्राफ भी अधिक विजुअल बोध प्रदान करते हैं। किशोरों ने विशेष रूप से कहा कि अन्य कई लड़के - लड़कियां भी ऐसा ही सोचते या डर महसूस करते हैं।

डेटा संबंधी खामियों के बारे में सावधान रहें: सभी परामर्शदाता जिला स्तर के डेटा की आवश्यकता और डेटा के विशिष्ट पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दोहराते हैं, उदाहरण के लिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी डेटा। वे विस्तार से बताते हैं कि डेटा को पृथक्कृत किया जाना चाहिए और विभिन्न समुदायों, पहचानों और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं के लिए अलग और विशिष्ट डेटा होना चाहिए, और सुझाव है कि जाति और धर्म जैसे मानकों को जोड़ा जाना चाहिए, और ट्रांसजेंडर लोगों को शामिल करने के लिए डेटा एकत्रण को केवल दो जेंडर से परे देखने की कोशिश करना चाहिए। 

वास्तविक परिवर्तन में समय लगता है : कई परामर्शदाताओं को विश्वास था कि इन अंतःक्षेपों से बदलाव में तेजी आई है, और इससे वे जिन समुदायों के सदस्यों के साथ काम करते हैं, वे विशेष रूप से किशोर, अधिकारियों से संपर्क करने में सक्षम हुए हैं। अधिकांश इस बात से सहमत हैं कि जब पहली बार वे किशोरों से मिले थे और उन्हें UDAYA के डेटा की जानकारी दी थी, तब से बहुत कुछ बदल गया है। निकट भविष्य की योजनाओं में किशोरों के हितों के प्रयासों को एक जिले से शुरू करने और फिर बढ़ाकर राज्य स्तर पर प्रयास करने का विचार किया गया है, जिससे किशोरों के स्वास्थ्य हेतु सेवा प्रदायगी के लिए एक बड़े बजट की सिफारिश की जा सके, जिसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और राज्य स्तरीय निगरानी समिति हो।

किशोर स्वास्थ्य सेवा वितरण पर और भी जागरूकता, बातचीत और कार्रवाई हुई है। कुछ माह पूर्व जब आयरन फोलिक की गोलियां समाप्त हो गई तो किशोर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास पहुंचे और गोलियों का अनुदान मंजूर कर इनका वितरण किया गया। पहले इस विषय को समुदाय के सामने लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब युवा जागरूक हैं और कदम उठा रहे हैं।”